Friday, September 24, 2021
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100 से ज्यादा नक्सल ऑपरेशन में शामिल रहे, राष्ट्रपति पदक मिलेगा

बृजलाल भारद्वाज नक्सलियों के लिए खौफ का दूसरा नाम है। 100 से ज्यादा नक्सल ऑपरेशन में 17 नक्सलियों को मार गिराने वाले इंस्पेक्टर बृजलाल भारद्वाज को देश की सेवा और अद्भुत वीरता के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इंस्पेक्टर भारद्वाज को अगले साल 26 जनवरी के दिन राष्ट्रपति पुरस्कृत करेंगे। इंस्पेक्टर बृजलाल भारद्वाज अभी बिलासपुर के मंगला ट्रैफिक थाना में बतौर प्रभारी पदस्थ हैं।

मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा

इंस्पेक्टर भारद्वाज 1 साल पहले तक सुकमा के DRG में अपनी सेवा दे चुके हैं। इस दौरान उनके सामने कई चुनौतियां भी आईं। इन चुनौतियों से वे डिगे नहीं और हर मुश्किल का डट कर सामना किया। सुकमा के कई नक्सल ऑपरेशन को इंस्पेक्टर भारद्वाज ने लीड किया है। 2016 से 2020 तक काम करने के दौरान उन्होंने दर्जनों नक्सलियों को मार गिराने में सफलता हासिल की। बृजलाल भारद्वाज ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ऑपरेशन के दौरान कई तरह की मानसिक और शारीरिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन सीनियर अधिकारियों के सहयोग की वजह से सब कुछ ठीक हो गया।

बृजलाल भारद्वाज DRG में अपनी सेवा दे चुके हैं।
बृजलाल भारद्वाज DRG में अपनी सेवा दे चुके हैं।

2019 में राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए भेजा गया था नाम

बृजलाल भारद्वाज के अदम्य साहस को देखते हुए छत्तीसगढ़ गृह विभाग ने साल 2019 में उनका नाम राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा था। इस साल 14 अगस्त को केंद्र सरकार ने देश भर से राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए 31 वीर सिपाहियों की लिस्ट जारी की। इस सूची में भारद्वाज भी शामिल है।

कई दिनों तक जंगल में फंसे

बृजलाल ने बताया कि सुकमा के घने जंगलों में कई बार वो अपनी टीम के साथ कई दिनों तक जंगल में ही फंस जाते थे। वहां नेटवर्क भी काम नहीं करता था। ऐसे में नक्सलियों द्वारा सड़क काटना, पुल को उड़ा देना और गाड़ियों की तलाशी जैसी चुनौतियों के बावजूद वह 4 साल तक बेहतर काम करते रहे।

3 बार नक्सलियों ने घेरा

इंस्पेक्टर भारद्वाज ने बताया कि सुकमा के सर्च ऑपरेशन के दौरान 3 बार ऐसा हुआ जब नक्सलियों ने जवानों की पूरी टीम को चारों तरफ से घेर लिया था। सभी को लग रहा था कि यहां से बचकर निकलना नामुमकिन है, लेकिन ऑपरेशन के प्रभारी बृजलाल भारद्वाज ने अपने सहयोगियों के साथ रणनीति बनाकर नक्सलियों के मंसूबे पर पानी फेर दिया। उनकी सूझबूझ और समझदारी का ही नतीजा है कि सभी जवान नक्सलियों के बीच से सुरक्षित लौट आए।

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