Sunday, September 19, 2021
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क्या कोरोना वायरस और खून का थक्का जमने का कोई संबंध है, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

दुनियाभर में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, इस बीच महामारी पर अध्ययन भी जारी है। मेडिकल जर्नल रेडियोलॉजी में भी इस महामारी के बारे में लगातार जानकारी प्रकाशित हो रही है। ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना वायरस और खून के थक्के जमने का कोई संबंध हो सकता है। अलग-अलग रिपोर्ट टीम ने बताया है कि बड़ी संख्या में कोरोना वायरस के गंभीर मरीजों में खून का थक्का जमने की स्थिति पाई गई है। कोरोना वायरस से बड़ी संख्या में लोगों के मरने के पीछे एक कारण यह भी हो सकता है।

रेडियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, कोविड-9 का शिकार होने वालों में निमोनिया, श्वास रुकना और इसके कारण महत्वपूर्ण अंगों का काम बंद कर देना मौत के कारण रहे हैं। इसमें मरीज की उम्र और शरीर में पहले मौजूद बीमारियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। वहीं बड़ी संख्या में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजो की मौत के पीछे खून का थक्का जमने का कारण भी पता चला है।

जानिए क्या है ब्लड क्लॉटिंग

खून का थक्का जमने को डॉक्टरी भाषा ब्लड क्लॉटिंग कहा जाता है।  ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का बनना अच्छा माना जाता है, क्योंकि चोट लगने पर इसकी वजह से ही खून का बहना रुकता है। लेकिन जब यही क्लॉट शरीर के अंदर बनता है और इसे बाहर निकलने की जगह नहीं मिलती है, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। यह शरीर में रक्त के प्रवाह को बाधित करता है जो जानलेवा हो जाता है। (जब चोट लगने पर खून का थक्का नहीं जम पाता है, तो इसे हीमोफीलिया बीमारी भी कहा जाता है।)

डॉ. आयुष पांडे के अनुसार, शरीर में मौजूद विशेष प्रकार के प्रोटीन के कारण खून जमता या रुकता है। कई मामलों में इसके पीछे वंशानुगत कारण भी होते हैं। ब्लड क्लॉट की स्थिति में शरीर में कई समस्याएं हो सकती हैं। ब्लड क्लॉट से हार्ट अटैक, पैरालिसिस होने का खतरा बढ़ जाता है।

कोरोना वायरस के इलाज में और मुश्किल

डॉ. अजय मोहन के अनुसार, दुनिया में अभी कोरोना वायरस का इलाज नहीं मिला है। अभी डॉक्टर लक्षणों का इलाज कर रहे हैं जैसे सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, गले में दर्द और श्वास संबंधी समस्या के लिए अलग-अलग दवाएं दी जा रही हैं।

यूके में यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के वैज्ञानिकों का कहना है कि खून का थक्का जमने के लक्षण भी कोरोना वायरस के दौरान नजर आते हैं, तो इससे इलाज मुश्किल होगा। इनका मानना है कि वायरस इन्फेक्शन का असर ब्लड क्लॉटिंग पर हो सकता है। खून के जरिए ये ब्लड क्लॉट्स फेफड़ों तक जा सकते हैं, हालात को और मुश्किल बना सकते हैं। हालांकि, इन वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि यह बहुत शुरुआती रिपोर्टस् हैं। अभी कुछ ही मरीजों पर इसका अध्ययन किया गया है। साथ ही डॉक्टरों से कहा गया है कि कोरोना संक्रमण के संदिग्धों में डी-डिमेर लेवल की जांच भी की जाए। यदि खून के थक्के जमने की आशंका नजर आए तो समय रहते मरीज को इलाज दिया जाए।

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