जयपुर : पांच साल पहले जिस बंजर चारागाह पर एक तिनका भी नहीं था, ग्रामीणों ने वहां पर 300 प्रजातियों के 50 हजार पौधे लगा दिए

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जयपुर . पांच साल पहले जिस बंजर चारागाह में घास का तिनका भी नहीं था आज वहां 300 प्रजातियों के 50 हजार पौधे लहलहा रहे हैं। हर पौधा क्यूआर कोड स्कैनर और ड्रिप इरिगेशन सिस्टम से जुड़ा है। भीलवाड़ा जिले की आसींद तहसील के मारवों का खेड़ा गांव के इस 500 बीघा चारागाह को राजस्थान सरकार के जल ग्रहण विभाग ने रोल माॅडल मानते हुए इसी तर्ज पर पूरे राजस्थान के चारागाह को विकसित करने की योजना बनाई है। सरकारी वन महोत्सव में लगाए गए पौधे जहां कुछ समय बाद ही सूख कर दम तोड़ देते हैं वहीं इस चारागाह भूमि में लगाए गए 95 प्रतिशत पौधे जिंदा हैं।

इंटर्नशिप के लिए आ रहे हैं विवि के छात्र  :
सरदार वल्लभ भाई पटेल विश्वविद्यालय सहित देश के 4 कृषि विश्वविद्यालयों के 45-45 छात्र यहां इंटर्नशिप के लिए आ रहे हैं। पंजाब के मनरेगा आयुक्त, आंध्रप्रदेश में रोजगार रिफॉर्म स्कीम से जुड़े चार जिला प्रमुख, काजरी इंस्टीट्यूट जोधपुर के अधिकारी यहां पहुंचकर चारागाह विकसित किए जाने के तरीकों की जानकारी ले चुके हैं।

क्यूआर कोड स्कैनर से मिलती है जानकारी :
इस चारागाह में  सभी पौधों पर क्यूआर कोड लगा है जिसे स्कैन करते ही पूरी जानकारी आ जाती है। उस पौधे का नाम, किस्म, वैज्ञानिक नाम, उपयोग, उम्र आदि जानकारियां मिल जाती हैं। विद्यालयों के बच्चों को यहां वनस्पति की जानकारी के लिए आते हैं। बेटियां रक्षासूत्र बांधकर रक्षा का संकल्प लेती हैं।

कैसे हुई शुरुआत :
2017 में ग्राम वासियों ने बिना प्रशासनिक मदद के रूपपुरा ग्राम पंचायत के मारवों का खेड़ा चारागाह को अतिक्रमण मुक्त किया। आसींद पंचायत समिति की प्रधान लक्ष्मी देवी, विकास अधिकारी गोपाल लाल टेलर और समाजसेवी व चारागाह संरक्षक कन्हैयालाल साहू के प्रयासों से यहां पौधे लगाने की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत इस चारागाह भूमि पर सीमेंटेड ट्रेंच बनाए गए ताकि जंगल का पानी जंगल में ही रोका जा सके। दो साल से यहां मनरेगा श्रमिक पौधे लगाने में जुटे हैं। अब तक 300 प्रजाति के 50 हजार छायादार, फलदार, बायोफ्यूल और औषधीय लगाए जा चुके हैं। पानी बचाने के लिए हर पौधे को ड्रिप इरिगेशन से जोड़ा गया है तथा बिजली बचाने के लिए सोलर पंप लगाए गए हैं।

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