Tuesday, September 21, 2021
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पटना : जेडी वीमेंस कॉलेज ने छात्राओं के बुर्का पहनकर आने पर लगाई थी पाबंदी, 24 घंटे में वापस लिया आदेश

पटना. छात्राओं के बुर्का पहनकर आने पर पाबंदी संबंधी आदेश पर मचे बवाल के बाद 24 घंटे में पटना के जेडी वीमेंस कॉलेज प्रशासन ने अपने आदेश को वापस ले लिया है। कॉलेज की प्राचार्या श्यामा राय ने कहा है कि कॉलेज ने ड्रेस कोड संबंधी उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें छात्राओं के बुर्का पहनकर आने पर पाबंदी लगाई गई थी।

शुक्रवार को लगी थी बुर्का पर पाबंदी
जेडी वीमेंस कॉलेज में शुक्रवार को महिलाओं के बुर्का पहनकर आने पर पाबंदी लगी थी। कॉलेज प्रशासन ने ड्रेस कोड को लेकर नए नियम लागू किए थे। इसके मुताबिक, सभी छात्राओं को एक तय ड्रेस में ही कॉलेज आना था। सिर्फ शनिवार को ही छात्राएं अलग ड्रेस में आ सकती थी। हालांकि, इस दिन भी वे बुर्का नहीं पहन सकतीं। इन नियमों के उल्लंघन पर 250 रुपए के जुर्माने का प्रावधान रखा गया था।

नए नियमों पर छात्राओं ने आपत्ति जताई थी

कॉलेज के नए नियमों पर छात्राओं ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि बुर्के से कॉलेज को क्या दिक्कत हो सकती है ये नियम थोपने वाली बात है। इस मामले में प्राचार्या डॉ. श्यामा राय ने कहा था कि ये घोषणा हमने पहले ही की थी। नए सेशन के ओरिएंटेशन के समय में छात्राओं को इस बारे में बताया गया था। हमने ये नियम छात्राओं में एकरूपता लाने के लिए किया है। शनिवार के दिन वो अन्य ड्रेस पहन सकती हैं, शुक्रवार तक उन्हें ड्रेस कोड में आना होगा।

लड़कियां बुर्का पहनकर पढ़ने जाएं, यह इस्लाम में नहीं: इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज
वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज़ फॉर डायलॉग की डीजी डॉ. जीनत शौकत अली कहती हैं कि बुर्का शब्द कहीं पर भी कुरान में नहीं आया है। कॉलेज अगर किसी के विशेष पहनावे पर रोक लगाता है तो यह व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो सकता है। इस्लाम में कहीं नहीं कहा गया है कि बच्चियां बुर्का पहनकर पढ़ने जाएं। बस महिलाओं को सम्मानजनक तरीके से कपड़े पहनने को कहा गया है। छोटी-छोटी बातों को तूल देने की बजाय बच्चियों को पढ़ाने पर जोर देना चाहिए।

कॉलेज में ड्रेस कोड का पालन करना चाहिए: वरिष्ठ वकील
पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रभाकर टेकरीवाल का कहना है कि अगर कॉलेज में ड्रेस कोड तय है, तो उसका पालन जरूरी है। वकील तक कोर्ट के लिए तय ड्रेस कोड का पालन करते हैं। कोर्ट में कोई बुर्का पहन कर नहीं आता। लिहाजा, कॉलेज के मामले में भी आपत्ति का औचित्य नहीं है। कानूनन भी इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

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