Wednesday, September 22, 2021
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गुड़गांव में ब्लैक फंगस से झज्जर के युवक की मौत:28 साल का युवक 25 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हुआ था

गुड़गांव में अब ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) के कई मामले सामने आ रहे हैं जो जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए एक और चिंता का विषय बनता जा रहा है। बुधवार शाम को झज्जर जिला के लुहारी गांव के रहने वाले 28 साल के युवक विकास शर्मा की ब्लैक फंगस के कारण मौत का मामला सामने आया है। पेशेंट को प्राइवेट अस्पताल गुड़गांव में एडमिट कराया गया था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिला में अब तक ब्लैक फंगस के करीब 30 मामले सामने आ चुके हैं और करीब 50 और लोगों के इस बीमारी से पीड़ित होने की आशंका है।

अस्पताल पर 24 घंटे में 7.21 लाख रुपए का बिल बनाने का आरोप।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि कोविड से ठीक हुए लोगों में ब्लैक फंगस का संक्रमण पाया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने डेथ समरी में विकास शर्मा को ब्लैक फंगस के साथ-साथ कोर्डियक अरेस्ट से मौत होना बताया है। परिजन ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर 24 घंटे का बिल 7.21 लाख रुपए बना दिया। विरोध करने पर अस्पताल में साढ़े तीन लाख रुपए वसूल लिए। मृतक विकास के ससुर विनोद वशिष्ठ ने बताया कि गत 25 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हो गए थे, जिनको इलाज के लिए पहले रेवाड़ी मेट्रो अस्पताल ले गए थे। बाद में उन्हें गुड़गांव में एडमिट कराना पड़ा था।

‘स्‍टेरॉयड की वजह से बढ़ रहे ब्‍लैक फंगस के मामले’

गुड़गांव सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा कि जिले में हमारे पास 50 मामले हैं और हमने शहर के सभी अस्पतालों को रोजाना नंबर अपडेट करने का निर्देश दिया है और स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिकता के आधार पर सूचित किया है। स्वास्थ्य विभाग ने एक समिति का गठन किया है और अस्पताल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन मांगने वाले पैनल पर सीधे आवेदन कर सकते हैं। गुड़गांव के पारस अस्पताल के ENT विभाग के प्रमुख डॉ. अमिताभ मलिक ने बताया कि यह संक्रमण ज्यादातर मधुमेह से पीड़ित रोगियों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को हो रहा है। जब एक मधुमेह रोगी को कोविड होता है, तो उसे एक स्टेरॉयड दिया जाता है, जो प्रतिरक्षा को भी कमजोर करता है और ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है। सामान्य कोरोना मरीजों को यह संक्रमण नहीं होता है।

‘कोरोना के इलाज के बाद ब्‍लड शुगर न बढ़ने दें’

अमिताभ मलिक ने कहा कि यह मधुमेह, कैंसर या अंग प्रत्यारोपण वाले लोगों को प्रभावित करता है। बीमारी से जुड़े सामान्य लक्षण सिरदर्द, चेहरे का दर्द, नाक में दर्द, द्दष्टि की हानि या आंखों में दर्द, गाल और आंखों की सूजन है। मलिक ने बताया कि सोमवार से उन्होंने 30 वर्ष के दो ऐसे युवा रोगियों का ऑपरेशन किया है जो पहले मधुमेह के रोगी नहीं थे, लेकिन उन्हें म्यूकोर्मिकोसिस हो गया था। इसका कारण यह है कि उनके रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी नहीं की गई, जबकि उन्हें स्टेरॉयड दिए गए थे। डॉक्टर सलाह देते हैं कि कोविड के इलाज के बाद मधुमेह की स्थिति में हाइपरग्लेसेमिया को नियंत्रित करें और ब्लड शुगर के स्तर पर लगातार नजर रखें और इसे बढ़ने न दें।

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