Saturday, September 18, 2021
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जोधपुर : आसाराम इस बार नहीं बंधवाएगा राखी, अनुयायियों को कहा- मुझे राखी भेजी तो अवज्ञा का दोष लगेगा

जोधपुर : अपने आश्रम की नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम ने इस बार राखी बंधवाने से इनकार कर दिया है।

आसाराम ने ऋषि प्रसाद मैग्जीन के जुलाई के अंक में राखी के पवित्र बंधन को लेकर अपने आलेख में लिखा है कि भाई-बहन के निर्मल प्रेम के आगे काम ठंडा हो जाता है, क्रोध शांत हो जाता है। सहायता, करुणा व साथ चलने की शक्ति आ जाती है। साथ ही उन्होंने इस बार जेल में उन्हें राखियां नहीं भेजनी की नसीहत भी अपनी अनुयायियों को दी है। इस नसीहत के साथ यह सीख भी दी है कि ऐसा नहीं करने पर उन्हें अवज्ञा का दोष लगेगा। उल्लेखनीय है कि जेल जाने के बाद से अनुयायी जेल में राखियां भेजने के साथ जेल के गेट पर भी राखी बांधती रही हैं।

दरअसल, आसाराम के जेल जाने से लेकर अब तक उनके अनुयायी वार-त्योहार पर जेल पहुंचकर अपनी भावनाएं दिखाते हैं। रक्षा बंधन पर तो देश के कई इलाकों से महिलाएं आती हैं और जेल के गेट पर ही राखी बांधकर चली जाती हैं। बड़ी संख्या में राखी के लिफाफे जेल में पहुंचते हैं। एसएसी-एसटी कोर्ट ने पिछले साल आसाराम को यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए आखिरी सांस तक आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था। निचली कोर्ट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हालांकि आजीवन कारावास की सजा से दंडित होने की वजह से आसाराम की अपील खंडपीठ में विचाराधीन है। इस बार वे अनुयायियों से आग्रह कर रहे हैं कि जेल में राखी न भेजें।

ऋषि प्रसाद में पतले से धागे से श्रद्धा-संकल्प का पवित्र बंधन आलेख के साथ उनके नाम से लिखा गया है कि मन ही मन राखी अर्पण करके बांधना। यहां सारी राखियां मेरे तक नहीं पहुंचतीं। राखी नहीं भेजने की आज्ञा मानने पर पुण्य होगा, भेज कर आज्ञा का उल्लंघन करने पर अवज्ञा का दोष होगा। इस मामले में जोधपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक कैलाश त्रिवेदी का कहना है कि आसाराम के नाम जितनी भी राखियां आती हैं, उनकी तलाशी लेकर आसाराम तक पहुंचा दी जाती है।

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