Saturday, September 18, 2021
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गुरमीत राम रहीम पर मेहरबानी, एम्स दिल्ली में वापसी तक मिले स्पेशल गेस्ट

साध्वियों के साथ यौनशोषण के मामले में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की सिक्योरिटी में लगे पुलिस अधिकारी विवादों में घिर गए हैं। डीएसपी रैंक के एक अधिकारी ने अपने सहयोगियों को भरोसे में लेकर डेरा प्रमुख को उस समय खूब छूट दी, जब वह अपने इलाज के लिए कुछ टेस्ट कराने को एम्स दिल्ली गया था। वहां डेरा प्रमुख से कुछ लोग मिले थे, जिनमें महिलाएं भी शामिल थी। डेरा प्रमुख जब पुलिस वाहन के जरिये वापस लौट रहा था, तब भी रास्ते में जगह-जगह वाहन रोके गए। एक स्थान से तो दो महिलाएं भी डेरा प्रमुख के वाहन में बैठाए जाने की सूचना प्रदेश सरकार के पास पहुंची है।

एम्स दिल्ली से रोहतक की सुनारिया जेल तक लौटते वक्त डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को स्पेशल गेस्ट मिले। यही नहीं बताया जा रहा है कि इस दौरान दो महिलाएं भी गुरमीत राम रहीम के साथ बैठी।

हरियाणा के जेल मंत्री रणजीत चौटाला डेरा प्रमुख की सिक्योरिटी में बरती गई लापरवाही से नाराज हैं, लेकिन साथ ही कहते हैं कि जेल मैन्युअल के हिसाब से कैदी एक समान होते हैं। इलाज या टेस्ट के दौरान यदि किसी कैदी को अन्य बाहरी व्यक्ति से मिलने की इजाजत होती है तो डेरा प्रमुख के लिए भी यह सुविधा रहेगी, लेकिन ऐसी अनुमति ली गई है या नहीं, इस बारे में वह अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करेंगे।

डेरा प्रमुख की सिक्योरिटी को लेकर विवाद ऐसे समय पर खड़ा हुआ है, जब शुक्रवार से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। इसके अलावा डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में सीबीआइ कोर्ट द्वारा 26 अगस्त को फैसला दिया जाना है। हत्या के इस केस में डेरा प्रमुख को मुख्य आरोपित माना गया है। सीबीआइ कोर्ट हालांकि 26 अगस्त से पहले फैसला देने पर विचार कर रही थी और फैसले के दिन डेरा प्रमुख को भी कड़ी सिक्योरिटी में अदालत में पेश किए जाने का विचार बनाया गया था, लेकिन हरियाणा सरकार के वकीलों ने कोर्ट से अनुरोध किया कि डेरा प्रमुख की व्यक्तिगत पेशी से कानून व्यवस्था की स्थिति बगड़ सकती है। इसलिए वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये ही उसकी पेशी कराई जाए। अदालत ने सरकार के वकीलों के इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।

डेरा प्रमुख रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। उसने कई बार पैरोल लेने की कोशिश की, लेकिन हर बार कोई न कोई अड़चन पैदा होती रही। पिछली 17 जुलाई को कुछ ऐसे टेस्ट कराने के लिए गुरमीत राम रहीम भारी सिक्योरिटी में दिल्ली स्थित एम्स गया, जो सिर्फ वहीं हो सकते थे। महम के डीएसपी के हवाले डेरा प्रमुख की सिक्योरिटी थी। डीएसपी रैंक के ही एक अधिकारी ने अपने दो उच्चाधिकारियों को एक पत्र लिखकर डेरा प्रमुख पर बरती गई कृपा की जानकारी दी गई। डीएसपी ने अपने उच्चाधिकारियों को बताया कि डेरा प्रमुख को एम्स में कुछ लोगों व महिलाओं से मिलवाया गया। इसके अलावा जब वह टेस्ट कराकर लौट रहा था, तब रास्ते में बार-बार वाहन रोके गए और दो महिलाओं को वाहन में चढ़ाया भी गया।

डीएसपी की रिपोर्ट के अनुसार इस बारे में जब सुरक्षा का प्रभार संभाल रहे डीएसपी से पूछा गया तो उसने कहा कि चंडीगढ़ से किसी वीआइपी का फोन आया था। साथ ही डीएसपी ने यह आशंका भी जताई कि हो सकता है कि सभी को गुमराह करने के लिए चंडीगढ़ से किसी वीआइपी का फोन आने की कहानी बनाई गई हो। पुलिस महानिदेशक पीके अग्रवाल के संज्ञान में जब यह मामला आया तो आरोपित डीएसपी व पुलिस अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

किसी कैदी के अधिकारों का हनन भी तो नहीं कर सकते

मामले में जेल मंत्री रणजीत चौटाला का कहना है कि डेरा प्रमुख की सुरक्षा में किसी तरह की चूक नहीं बरती जा रही है। जेल मैन्युअल में जिस तरह बाकी कैदी होते हैं, उसी तरह से डेरा प्रमुख भी एक कैदी है। जिस तरह बाकी कैदियों को पैरोल लेने, बीमार होने पर इलाज कराने का अधिकार है, उसी तरह से डेरा प्रमुख को भी है। ऐसे गंभीर कैदियों का भारी सुरक्षा के बीच आवागमन जेल अधिकारियों व पुलिस विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। इलाज के दौरान उन्हीं लोगों को मिलने की अनुमति कैदी से दी जाती है, जिनकी अनुमति मांगी गई है। इसके अलावा यदि कोई मिलता है तो यह गलत है। हम किसी की स्वतंत्रता और अधिकारों का हनन तो नहीं कर सकते, लेकिन यदि कहीं सिक्योरिटी में चूक हुई है और अनाधिकृत रूप से किसी को लाभान्वित करने की कोशिश हुई है तो आरोपितों के विरुद्ध क़ड़ी से कड़ी कार्रवाई बनती है।

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