Thursday, September 16, 2021
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मुख्यमंत्री गहलोत से जानिए कैसा हो सपनो का भारत

हमारे देश का संविधान हम सबके लिए एक ग्रन्थ की तरह है। यह ग्रन्थ हमें इस देश को आगे ले जाने का रास्ता दिखाता है। भारत के संविधान की प्रस्तावना में जो शब्द लिखे हुए हैं, उन पर आप सभी को गौर करना चाहिए और इसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए।आज हमारे देश को आजाद हुए 74 साल हो गए हैं। 1947 में हम सबने मिलकर दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य को भारत से निकाल दिया था। इस आजादी की सबसे बड़ी बात ये थी कि भारत ने आजाद होने के लिए किसी दूसरे देश की मदद नहीं ली थी। हमारे देश के लोगों ने ही एकता दिखाकर, आपस में साथ मिलकर इस देश को आजाद करवाया।

भारत की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों में सभी जाति, धर्म, वर्ग, संप्रदाय शामिल थे। सबने मिलकर इस देश को आजादी दिलाई, जब देश आजाद हुआ तो भारत और पाकिस्तान दो देश बन गए। पूरी दुनिया ये कयास लगाती थी कि इतने धर्म, जाति और भाषाओं वाला भारत देश एक नहीं रह सकेगा और जल्द ही टुकड़ों में टूट जाएगा, लेकिन पंडित जवाहर लाल नेहरू जैसे दूरदृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री थे, जो जानते थे कि इतनी विविधताओं से भरे इतने विशाल देश को कैसे एक रखना है।

इसी का नतीजा है कि आजादी के बाद भारत में नए राज्य आकर जुड़े, लेकिन कोई अलग नहीं हुआ। भारत से पांच गुना छोटे देश पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए और बांग्लादेश नया देश बन गया, पर भारत आज भी एक और अखंड है, जिन्हें लगता हो कि ये बहुत बड़ी बात नहीं है उन्हें विश्व का इतिहास पढ़ना चाहिए। युगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया, सूडान, सोवियत यूनियन समेत न जाने कितने ऐसे देश हैं जो कई टुकड़ों में टूट गए। यूरोप में युगोस्लाविया एक देश हुआ करता था, जिसका क्षेत्रफल राजस्थान से भी कम और जनसंख्या दिल्ली से भी कम थी। यहां अलग-अलग भाषाओं और संप्रदायों वाले लोग रहते थे।

आज वह युगोस्लाविया देश 6 देशों में बंट गया है, लेकिन हमारा भारत इतनी विविधताओं के बाद भी एक है। यही हमारी ताकत है। इस देश को एक रखने के लिए हमारे दो प्रधानमंत्रियों ने अपनी शहादत दी है। इंदिरा गांधी शहीद हो गईं, लेकिन खालिस्तान नहीं बनने दिया। राजीव गांधी शहीद हो गए जो इस उपमहाद्वीप में शांति स्थापित करना चाहते थे। हमारे देश का संविधान हम सबके लिए एक ग्रन्थ की तरह है। यह ग्रन्थ हमें इस देश को आगे ले जाने का रास्ता दिखाता है। भारत के संविधान की प्रस्तावना में जो शब्द लिखे हुए हैं उन पर आप सभी को गौर करना चाहिए और इसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए।

यही इस मुल्क को एक बेहतर मुल्क बनाने का रास्ता है। हमारे संविधान की प्रस्तावना भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्त्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने की बात करती है। इन सभी शब्दों का अर्थ है जिसे हमें समझना चाहिए। सबसे पहले संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न देश की हम बात करते हैं। यानी हमारा देश किसी भी बाहरी ताकत से पूरी तरह आजाद है। करीब 200 साल के संघर्ष के बाद भारत ने अंग्रेजों को यहां से खदेड़ दिया और एक संपूर्ण प्रभुत्त्व-संपन्न राष्ट्र बना। हमारी सेनाएं देश की संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम हैं। समाजवाद का अर्थ एक ऐसे समाज से है जहां सभी के पास समान अधिकार हों, समान संपदा हो एवं समाज में समानता का भाव हो। ऊंच नीच एवं असमानता का भाव ना हो।

पंथनिरपेक्षता हमें सिखाती है कि भारत की कोई भी सरकार किसी भी एक धर्म की पक्षधर न होकर सर्व धर्म समभाव की भावना के साथ कार्य करेगी। भारत में सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान मिलेगा। लोकतांत्रिक गणराज्य का अर्थ है कि भारत में लोकतंत्र यानी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा जनता के लिए शासन हो और वहां सबकी समान सुनवाई हो और उनको मिले अधिकार सरकार उन्हें दिलवाना सुनिश्चित करे।

हमारा लोकतंत्र ऐसा होना चाहिए जहां वंचित तबके का व्यक्ति भी अपने राज्य या देश के प्रमुख से अपने हक के लिए बिना किसी डर के सवाल कर सके। एक ऐसा लोकतंत्र जहां कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका अपना दायित्व का निर्वहन देशहित में संविधान के अनुरूप करें।

पिछले कुछ सालों में जिस तरह के घटनाक्रम हमारे देश में हुए हैं, उनसे कहीं ना कहीं देश और दुनिया में संदेश गया है कि भारत में संविधान की पूरी तरह पालना नहीं हो रही है और देश का लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। पिछले कुछ सालों में कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जिसे देखकर देशवासी भी हैरान रह गए हैं। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। सबसे अधिक चिंताजनक तो यह है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इन सवालों का जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों को ही कठघरे में खड़ा कर देते हैं।

हमारे भविष्य के भारत में आपस में सभी धर्म, जाति एवं वर्ग के लोगों में सौहार्द की भावना होनी चाहिए। हमारा भारत हमारे संविधान और लोकतंत्र की भावना से चलने वाला देश होना चाहिए। यदि लोग आपस में वैमनस्य रखेंगे तो देश तरक्की नहीं कर सकता है। हमें 21वीं सदी के भारत के सपने को साकार करने पर कार्य करना होगा। शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा। सभी को साथ लेकर चलने की भावना के साथ काम करना होगा। हमारा सपना एक ऐसे भारत का है, जहां शांति, सद्भाव एवं विकास हो और वह दुनिया का सबसे विकसित मुल्क हो।

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