Tuesday, September 28, 2021
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देर रात शॉर्ट-सर्किट से लगी आग:आयुष अस्पताल के आईसीयू के एसी में आग, पांच मरीजों की मौत, 15 को बचाया

लाल दरवाजा स्थित आयुष अस्पताल के आईसीयू में एसी में शार्ट सर्किट से आग लगने से हड़कंप मच गई। वार्ड में कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा था। आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। लाल दरवाजा में परम डॉक्टर हाउस स्थित आयुष अस्पताल के पांचवीं मंजिल के आईसीयू में आग लगने और मरीजों को शिफ्ट करने के दौरान पांच मरीजों की मौत हो गई।

  • एंबुलेंस से किया गया मरीजों को शिफ्ट
  • 9 एम्बुलेंस से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया

रविवार काे रात 11:39 बजे फायर ब्रिगेड को घटना की जानकारी मिली तो मुगलीसरा, मान दरवाजा, नवसारी बाजार और कतारगाम फायर स्टेशन की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। भर्ती मरीजों को शिफ्ट करना शुरू किया गया। इसमें छह एम्बुलेंस और 108 की तीन एम्बुलेंस लगी। 18 मरीजों को फायर ब्रिगेड द्वारा रेस्क्यू कर स्मीमेर, संजीवनी और सिम्स अस्पताल में तत्काल शिफ्ट करना शुरू किया गया।

रेस्क्यू काम रात 1 बजे तक चला। इस रेस्क्यू और शिफ्टिंग के दौरान चार मरीजों की मौत हो गई। सोमवार सुबह एक और मरीज की मौत हो गई। इस घटना में अब तक पांच मरीजों की मौत हो चुकी है। आयुष अस्पताल में आग की घटना की जानकारी मिलते ही मनपा मेयर, कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर जैसे आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए।

गांव से उपचार के लिए सूरत आए और जान गंवाई

मृतक रमेशभाई पडसाला निवृत्त जीवन यापन कर रहे थे। दो बच्चों में एक सूरत में डायमंड कंपनी में काम करता है। मूल भावनगर के महुवा निवासी थे। 20 अप्रैल को ही रमेशभाई उपचार के लिए सूरत आए थे। 21 को दाखिल हुए और रविवार अस्पताल में आग हादसे में मौत हो गई। आग दुर्घटना के मृतकों को कोविड गाइडलाइन के अनुसार सौंपा गया। अश्वनीकुमार श्मशान गृह में 4 घंटे की वेटिंग होने से शव मनपा के वाहन से कठोर श्मशान गृह ले जाया गया।

दुर्घटना के शिकार मरीज

1. रामजी जादव (60) 2. राजू मोहनभाई पटेल (52) 3. रमेश नरसिंघ (60) 4. अरविंद सिंगाड़ा 5. अल्पना विपिन मोरडिया (40)

एनसी दर्ज कर जांच कर रहे हैं

आयुष अस्पताल में आग लगने पर तुरंत मरीजों को अन्य अस्पताल में शिफ्ट करवाया गया, लेकिन अफरा-तफरी में 5 मरीजों की मौत हाे गई। इस मामले में अभी तक महिधरपुरा पुलिस ने एनसी दर्ज की है। इंस्पेक्टर आरके धुलिया ने बताया कि मौत आग लगने के कारण हुई है यह कहना मुश्किल है। इसमें मृतकों का पोस्टमार्टम भी नहीं होगा। इसलिए एनसी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

शिफ्टिंग में लापरवाही से भाई को खोया

आग लगने के बाद अस्पताल के मरीजों को शिफ्टिंग की कार्रवाई तेजी से नहीं की गई। जिससे मेरे भाई की मौत हो गई। ऑक्सीजन समय पर मिल गई होती तो मेरे भाई की जान बच गई होती। शिफ्टिंग में काफी समय लग गया था।

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