Thursday, September 23, 2021
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सुनिए जश्न-ए-आजादी के कुछ फसाने

आजादी के 75 साल होने पर पहली साप्ताहिक कड़ी में हम आपकाे सुना रहे हैं जश्न-ए-आजादी के कुछ फसाने जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी सरकार के जुल्म सहे लेकिन हार ना मानी औैर आजादी की लड़ाई में बलिदान दिया। जिले के भालाैठ गांव के चाैधरी हरीराम की तीन पीढ़ियाें ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया व जेल की यातना भी सही। हरीराम जहां मुल्तान की सेंट्रल जेल में रहे ताे उनकी 70 वर्षीय मां नान्ही, उनकी पत्नी नाहन्ती देवी, चाैधरी कर्णसिंह(6) औैर भगत सिंह (4) ने भी लाहाैर जेल रहे।

चाैधरी हरीराम ने वर्ष 1942 में चाैधरी रणबीर सिंह व नान्हू राम के साथ भारत छाेड़ाे आंदाेलन में हिस्सा लिया था। इन्हाेंने सांघी से पैदल मार्च किया। राेहतक में इन्हें अरेस्ट कर लाहाैर जेल भेजा गया। लेकिन केस न बनने के कारण इन्हें छह माह बाद छाेड़ दिया गया। एक माह बाद फिर आंदोलन में पूरा परिवार कूदा और जेल गया।

काल कोठरी में बीते सजा के सारे दिन, पसली की हड्‌डी तक अंग्रेजों ने तोड़ी

सात माह की गर्भवती नाहंती देवी ने लाहाैर जेल में तिरंगा फहराया था। इसी के अंग्रेज सिपाहियाें की दी यातनाओं से उनकी काॅलरबाेन और पसली की हड्‌डी टूट गई। फिर उन्हें कालकाेठरी में डाला गया। इसी दौरान उनका गर्भपात हाे गया। एक साल बाद परिवार की सजा खत्म हुई। नाहंती देवी की 1970 में अस्थमा की बीमारी के चलते मौत हो गई।

यातना में तेल कोल्हू में बैल की जगह बांध कराते थे मशक्कत

हरीराम के पाेते आनंद फाैगाट ने बकौल उनके पिता बताया कि उनके दादा से कोल्हू में बैल की जगह मशक्त कराई जाती थी। इसके साथ ही अंग्रेज दोनों पैराें काे बांधकर उन पर लाठियां मारते थे, हाथ से चक्की चलवाते थे।

आजादी के 25 वर्ष होने पर पीएम इंदिरा ने दिया था ताम्रपत्र, ग्राम सेवक की मिली थी नौकरी

आजादी के 25 वर्ष पूरे हाेने पर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने वर्ष 1972 में चाैधरी हरीराम काे अपने हाथाें से ताम्रपत्र भेंट किया था। स्वतंत्रता सेनानियों काे सरकारी नौकरी या मुरबे दिए जाते थे। चाैधरी हरीराम को ग्राम सेवक की नाैकरी दी गई।

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