Tuesday, September 21, 2021
Homeमहाराष्ट्रपीएमसी बैंक घोटाला: दो महीने तक पैसे मिलने की उम्मीद में जिये,...

पीएमसी बैंक घोटाला: दो महीने तक पैसे मिलने की उम्मीद में जिये, फिर तोड़ दिया दम

पंजाब और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) घोटाला मामले में सरकार राहत के लिए भले ही प्रयास कर रही हो, लेकिन लगता नहीं कि लोगों को भरोसा है. मुंबई के अंधेरी इलाके में रहने वाले 79 साल के मिस्टर तिरथ गुरनानी की मौत की कहानी से तो ऐसा ही लगता है.

मिस्टर तिरथ गुरनानी का पीएमसी बैंक की शाखा डीएन नगर, अंधेरी वेस्ट में अकाउंट था. गुरनानी ने इस बैंक में अपने पूरे जीवन की जमापूंजी 11 लाख रुपये जमा की थी.

घोटाले की जानकारी उन्हें अपने दोस्त से मिली. अगले ही दिन वो अपना फिक्स्ड डिपोजिट वाला बहीखाता लेकर बैंक पहुंच गए. बैंक वालों ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनका पैसा डूबेगा नहीं, जल्द ही उनके पास होगा. वो ख़ुशी-ख़ुशी वापस घर लौट गए.

इधर बार-बार वो टीवी पर न्यूज़ देखते रहते थे, जिससे कि इस बैंक से जुड़ी सभी अपडेट्स उन्हें मिलते रहें. जल्द ही उन्हें अहसास हो गया कि बैंक ने जो कुछ भी उनसे कहा वो झूठ था. वो पूरे दिन बैठकर अपनी जमापूंजी गिनते रहते थे. वो यह तय करने में लगे थे कि अगर अभी पैसे मिलेंगे तो राशि कितनी होगी. वो ऐसा बार-बार करने लगे. ऐसा लगा कि उनका मानसिक संतुलन ख़राब हो रहा है. उनकी भूख ख़त्म होती जा रही थी. वो पूरे दिन कुछ नहीं खाते थे. ऊपर से नींद के लिए ढेर सारी गोलियां खानें लगे. वो डिप्रेशन में चले गए थे.

28 सितंबर को वो एक बार फिर बैंक गए. चूंकि यह चौथा शनिवार था इसलिए बैंक बंद था. आमतौर पर गुरनानी साहब बैंक निकलने से पहले दिन काउंट करते थे. वो कैलेंडर भी चेक करते थे. बैंक कौन से दिन खुलेगा और कौन से दिन बंद होगा वो कभी भी मिस नहीं करते थे. ये पहली बार था जब वो यह देखना भूल गए कि बैंक आज बंद होगा या नहीं?

अचानक वो ज़मीन पर गिर गए. वो अपना होश खो चुके थे. परिवारवाले उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे. डॉक्टर ने उन्हें ICU (इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती कराने की सलाह दी. बाद में उन्हें बेले वुए मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया. जांच में पता चला कि अचानक ज़मीन पर गिरने से उनके सिर में ख़ून जम गया. मेडिकल की भाषा में इसे ‘सबड्यूरल हिमाटोमा’ कहते हैं. जल्द ही उनकी सर्जरी करानी पड़ी. वो 21 दिनों तक ICU में भर्ती रहे.

इस दौरान मिस्टर गुरनानी के परिवार वालों के पैसे अस्पताल में पानी की तरह बहते रहे. परिजनों को पता नहीं था कि अभी और भी बुरा देखना बाकी है.

गुरनानी, दिनबदिन और भी अवसादग्रस्त (डिप्रेशन) होते जा रहे थे. परिवारवालों ने साइकेट्रिस्ट से संपर्क किया. डॉक्टर ने उन्हें अवसाद (डिप्रेशन) से निकलने के लिए दवाई दी. साथ ही नींद की गोलियां और ज़्यादा बढ़ा दी.

एक महीने बाद वो फिर से कोमा में चले गए. जिसके बाद परिवारवाले फिर से उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे. उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया. लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. पीएमसी बैंक घोटाले के उजागर होने के ठीक दो महीने बाद 23 नवंबर को  तिरथ गुरनानी ने आखिरी सांस लीं.

एक महीने में आठ ग्राहकों की मौत

आपको बता दें कि इस बैंक में पैसा जमा करने वाले आठ ग्राहकों की एक महीने के अंदर मौत हो चुकी है, जिसमें से दो ने आत्महत्या कर ली थी. राज्य सरकार में मंत्री जयंत पाटिल ने इस मामले में एक नई पहल की है. जयंत पाटिल ने कहा है कि सरकार ने पीएमसी बैंक का महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (एमएससी) में विलय करने का सुझाव दिया है.

उन्होंने कहा, ‘हम लोगों को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि सरकार उनके साथ है. दोनों बैंको के विलय से छोटे जमाकर्ताओं को जरूर फायदा होगा.’ पाटिल ने आगे कहा कि एमएससी बैंकी की स्थिति ठीक है और विलय से कोई समस्या नहीं होगी.

सरकार जो भी कहे लेकिन सच तो यही है कि लोगों का भरोसा सरकार, सिस्टम सब से ख़त्म हो रहा है. एक लोकतांत्रिक देश के लिए इस तरह के हालात ठीक नहीं है.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments