Tuesday, September 28, 2021
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यूके चुनाव : प्रधानमंत्री जाॅनसन की कंजरवेटिव पार्टी को बहुमत, कश्मीर मुद्दे पर भारत का विरोध करने वाली लेबर पार्टी की हार

लंदन. ब्रिटेन में शुक्रवार को आम चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए। नतीजों में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सत्तासीन कंजरवेटिव पार्टी बहुमत के आंकड़े (326) को पार कर गई। विपक्षी लेबर पार्टी भी 200 सीटों की जीत के करीब है। एग्जिट पोल्स पहले ही कह चुके हैं कि जॉनसन की पार्टी आसानी से बहुमत के आंकड़े को पार करेगी और 650 सीटों वाली संसद में 368 सीटें जीतेगी। वहीं विपक्ष को 191 सीटें मिलने का अनुमान है। इस चुनाव में लेबर पार्टी का नेतृत्व कर रहे जेरेमी कॉर्बिन ने नतीजों पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि वे आगे किसी भी चुनाव में पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे। कॉर्बिन ने हार के पीछे ब्रेग्जिट को वजह बताया। कहा कि सामाजिक न्याय का मुद्दा आगे भी जारी रहेगा। हम वापसी करेंगे। लेबर पार्टी का संदेश हमेशा मौजूद रहेगा।

लेबर पार्टी ने सितंबर में पार्टी के वार्षिक सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर को लेकर आपातकालीन प्रस्ताव पारित किया था। इसमें पार्टी नेता जेरेमी कॉर्बिन ने क्षेत्र में प्रवेश के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक और वहां के लोगों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग करने के लिए कहा। हालांकि, लेबर पार्टी का यह रुख ब्रिटेन सरकार के अधिकारिक रुख के विपरीत है। ब्रिटेन सरकार का मानना है कि जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है।

यूके दुनिया का सबसे महान लोकतंत्र
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने शुरुआती नतीजों के बाद ट्वीट कर जीत पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, यूके दुनिया का सबसे महान लोकतंत्र है। जिन्होंने भी हमारे लिए वोट किया, जो हमारे उम्मीदवार बने, उन सबका शुक्रिया।”

हम यूके की भावनाएं नहीं समझ पाए: लेबर

इसी बीच लेबर पार्टी के अध्यक्ष इयान लेवेरी ने कहा है कि ब्रेग्जिट के लिए दूसरी बार जनमत संग्रह का प्रस्ताव देकर उनकी पार्टी ने गलती की। लेवेरी ने कहा कि इसके पीछे पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन की कोई गलती नहीं है। हम यूके के लोगों की भावनाओं को नहीं समझ पाए।

सबसे पहले ब्रेग्जिट डील पूरी होगी

भारतीय मूल की कंजरवेटिव नेता और ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने कहा, “जीतने के बाद सरकार सबसे पहले ब्रेग्जिट डील खत्म करने का काम करेगी। यह क्रिसमस से पहले भी हो सकता है।”

ब्रेग्जिट से नतीजों पर क्या फर्क? 
ब्रिटेन में यह पांच साल में तीसरे आम चुनाव हैं। वहीं 100 साल में यह पहली बार है, जब चुनाव दिसंबर में हो रहे हैं। कंजरवेटिव पार्टी और बोरिस जॉनसन का चुनाव में साफ संदेश है,‘ब्रेग्जिट पूरा करना।’ वहीं लेबर पार्टी इस पर बातचीत और दोबारा जनमत संग्रह चाहती है। लिबरल डेमोक्रेट पार्टी ब्रेग्जिट रद्द करने के पक्ष में है। माना जा रहा है कि ब्रिटिश जनता ब्रेग्जिट पूरा करने के लिए कंजरवेटिव के पक्ष में वोट करेगी। अगर सत्ता बदली तो विपक्षी पार्टियों के पास ब्रेग्जिट पर दोबारा जनमत संग्रह कराएगी और इससे देश फिर ईयू से बाहर होने की मुश्किलों में फंस जाएगा।

नए पीएम के लिए तीन चेहरों की चर्चा, चौथी दौड़ में नहीं पर महत्वपूर्ण

उम्मीदवारपार्टीवादे
पीएम बोरिस जॉनसनकंजरवेटिव
  • ब्रेग्जिट डील पूरी करना
  • इनकम टैक्स, इंश्योरेंस में योगदान और वैट नहीं बढ़ाएंगे
  • पॉइन्ट आधारित इमिग्रेशन
जेरेमी कॉर्बिनलेबर
  • ब्रेग्जिट पर फिर बातचीत
  • उद्योगों का दोबारा राष्ट्रीयकरण
  • कॉर्पोरेट टैक्स में बढ़ोतरी, अमीरों से 5% ज्यादा टैक्स
जो स्विंसनडेमोक्रेटिक लिबरल
  • ब्रेग्जिट डील रोक देंगे
  • टैक्स में मामूली बढ़ोतरी
  • क्लाइमेट चेंज से निपटने के लिए अलग से फंड रखेंगे
निकोला स्टर्जनस्कॉटिश नेशलिस्टअहम: प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं। पर सरकार बनाने में बहुमत हासिल करने में इनकी पार्टी की अहम भूमिका होगी।

आगे क्या: दोबारा जनमत संग्रह संभव

1). जॉनसन अगर बहुमत हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं तो फिर वो अपनी शर्तों पर यूरोपीय संघ से अलग होंगे। इसी के लिए यह चुनाव करवाया गया है।1- जॉनसन अगर बहुमत हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं तो फिर वो अपनी शर्तों पर यूरोपीय संघ से अलग होंगे। इसी के लिए यह चुनाव करवाया गया है।

2). अगर कोई दूसरी पार्टी जीतती है या कोई अन्य प्रधानमंत्री बनता है तो मुमकिन है कि वो ब्रिटेन को लोगों के सामने ब्रेग्जिट मसले पर दूसरे जनमतसंग्रह का प्रस्ताव रखे।

3). ‘नो डील ब्रेग्ज़िट’ यानी बिना किसी समझौते के ब्रिटेन के ईयू से निकलने के आसार भी हैं पर इसका ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर होगा।

सत्ता का गणितमैजिक नंबर 326
4.57 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर68% कुल जनसंख्या के
650 संसदीय सीटें हैं देश में326 बहुमत का आंकड़ा
  • स्कॉटलैंड-आयरलैंड भी यूनाइटेड किंगडम के चुनाव में शामिल होते हैं।

युवा अहम: 63 हजार युवा लिस्ट से जुड़े 
युवाओं की बढ़ती भागीदारी को यूथक्वैक कहा जा रहा है। चुनाव आयोग ने स्नैपचैट के साथ अभियान चलाकर 63 हजार से ज्यादा युवाओं को वोटिंग के लिए रजिस्टर किया।

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