Sunday, September 19, 2021
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छत्तीसगढ़ : दस से ज्यादा लोगों की जान लेने वाले हाथी को बंधक बनाए रखने पर मेनका गांधी के संगठन ने जताई आपत्ति

रायगढ़. मंगलवार की शाम छाल के जंगल से पकड़े गए उत्पाती हाथी गणेश को फिलहाल कोरबा के एक एलिफेंट कैंप में रखा गया है। धरमजयगढ़ और कोरबा के बीच गणेश का साथी जंगली हाथी ट्रक का पीछा कर रहे थे। ट्रैंक्विलाइज्ड होने के बाद भी ट्रक पर बंधे गणेश ने झटका मारकर बांधी गई बल्ली और रस्सी तोड़ दी। ट्रक के साथ वन विभाग के कर्मचारी भी थे जो गणेश को सरगुजा के तमोर पिंगला ले जा रहे थे। अनहोनी की आशंका के कारण गणेश को कोरबा के कुदमुरा अस्थाई एलिफेंट कैंप ले जाया गया। बुधवार को दिनभर उसे यहीं रखा गया।

24 घंटे तक जंगली हाथी को बंधक बनाए रखने पर मेनका गांधी की संस्था पीपुल्स फॉर एनीमल ने आपत्ति जताई। वन विभाग इसके बाद मुश्किल में है। पीएफए की छत्तीसगढ़ प्रमुख कस्तुरी बाला ने कहा कि हाथी को पता है उसे जंगल में कैसे रहना है।विभाग जबरदस्ती उसे बंधक बना कर दूसरी जगह शिफ्ट कर रहा है। इस पर बचाव करते हुए धरमजयगढ़ डीएफओ डाॅ. प्रणय मिश्रा ने कहा कि यदि हम गणेश को नहीं पकड़ते तो ग्रामीण करंट बिछा कर उसे मार देते। बहरहाल फॉरेस्ट की टीम गणेश को दूसरे ट्रक में शिफ्ट कर रात 9 बजे सरगुजा तमोर पिंगला के लिए रवाना हो गई है। सुबह सरगुजा पहुंचने के बाद एक्सपर्ट की पूरी टीम गणेश की जांच करेगी। उसके बाद उसे जंगल में छोड़ा जाएगा। फारेस्ट के अफसरों ने बताया कि तमोर पिंगला का जंगल गणेश के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। यहां आबादी कम होने के कारण जनहानि का खतरा नहीं है। यहां उनके लिए पर्याप्त भोजन और विचरण की व्यवस्था है।

तीरथराम ने किया था पस्त

गणेश ने पिछले लगभग ढाई महीनों में धरमजयगढ़ और कोरबा फॉरेस्ट डिवीजन में लगभग 10 से ज्यादा लोगों की जान ली है। गणेश ने फॉरेस्ट के बीट गार्ड मुकेश पांडेय समेत 6 लोगों को मारा। कोरबा में भी यह 4-5 लोगों को मार चुका है। वन मंडल ने गणेश पर काबू पाने एक्सपर्ट्स की सहायता मांगी थी। रविवार की देर शाम कुमकी हाथी बुलाए गए। मंगलवार की दोपहर गणेश का लोकेशन ट्रेस कर तीन कुमकी हाथी को जंगल में छोड़ा गया। कुमकी हाथी तीरथराम और गणेश का आमना सामना हुआ। हाटी-छाल के जंगल में सरगुजा से आए कुमकी हाथी तीरथराम ने 67 दिनों से धरमजयगढ़ वन मंडल में उत्पात मचा रहे गणेश पस्त किया था। मंगलवार की दोपहर लगभग 3 घंटे तक दोनों हाथियों में भिड़ंत हुई और आखिर में तीरथराम ने गणेश को पछाड़ दिया। लड़ाई में दांत टूटते ही गणेश पस्त हो गया। मौके पर इंतजार कर रहे एक्सपर्ट और वन विभाग के अफसर-कर्मचारियों की टीम ने तुरंत गणेश को ट्रैंक्विलाइज किया। मदहोश होने के बाद भी गणेश खड़ा हो गया और फिर जेसीबी की मदद से उसे ट्रक पर लादा गया।

ट्रक में चढ़ाने में 4 घंटे लगे 
रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक खरसिया-छाल मार्ग ब्लॉक रखा गया। करीब 7 घंटे तक दोनों तरफ से सड़क पर आवागमन बाधित रहा। इससे दोनों तरफ 10 किमी तक वाहनों की कतार लग गई। इनमें आधा दर्जन से ज्यादा यात्री बस, स्कूली बच्चों के वाहन, पर्यटक, स्थानीय जनप्रतिनिधि फंसे रहे। दोपहर 4 बजे गणेश को ले जाने के लिए ट्रक पर चढ़ाने की कोशिश शुरू हुई लेकिन वजन अधिक होने के कारण कर्मचारियों के पसीने छूट गए। करीब 4 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब साढ़े 8 बजे हाथी को ट्रक पर चढ़ाया।

दोस्त आया छुड़ाने 
वन कर्मियों ने बताया कि जंगल में जब कुमकी तीरथराम ने गणेश पर हमला किया तो उसके साथ एक हाथी और था। गणेश को ट्रक पर चढ़ाया जा रहा था तो उसे रोकने के लिए भी वह पहुंचा। ट्रक जाने लगा तो भी वह भी पीछे दौड़ा।

किशोर अवस्था में हाथी ज्यादा उत्पाती
एलिफेंट एक्सपर्ट बताते हैं कि हाथी सबसे समझदार वन्यप्राणी हैं। हालांकि वह किशोर अवस्था में ज्यादा उत्पात मचाता है। झुंड से अलग होने पर इन पर बड़े हाथियों की लगाम नहीं होती, ऐसी परिस्थितियों में यदि हाथी को पकड़कर बड़े हाथियों के साथ रखा जाए तो उसे काफी हद तक नियंत्रण में किया जा सकता है।
एक माह से तैनात था स्टाफ
छाल रेंज में धरमजयगढ़ में 50 से ज्यादा अफसरों और बीट गार्ड की टीम छाल में तैनात थी। ग्रामीणों को सतर्क करने से लेकर गणेश पर नजर रखी जा रही थी। वन विभाग की टीम ने 33 बार गणेश को बस्ती की तरफ आने पर खदेड़ा।

देहरादून और सरगुजा के एक्सपर्ट, तीन वन मंडल के डीएफओ, सौ से ज्यादा वनकर्मी पूरे दिन डटे रहे। हाथी की चुहकीमार, बोजिया, भलमुड़ी, नया लात, सिंघीझाप, तेंदूमुड़ी, बांसाझार, लामीखार, देऊरमाल, बेहरामार, कुदमुरा क्षेत्र में दहशत थी। आज वन विभाग के ऑपरेशन के बाद यहां के लोगों ने राहत की सांस ली।

छग से कई गुना हाथी केरल में, लेकिन जनहानि नहीं 
पीएफ के अनुसार केरल में 6000 से ज्यादा हाथी है, लेकिन वहां कम्यूनिकेशन सिस्टम बेहतर होने के कारण जनहानि कम है। जंगल के आसपास रहने वाले लोग काफी बेहतर और आसान जीवन जी रहे हैं। जबकि छत्तीसगढ़ में सिर्फ 250 हाथी और 40 प्रतिशत जंगल होने के बाद भी विभाग इन्हें संभाल नहीं पा रहा है। फारेस्ट को इन्हें शिफ्ट करने की बजाय कम्यूनिकेशन सिस्टम बेहतर बनाने में ध्यान देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि जिले में सालों से उत्पात मचा रहे हाथियों को विभाग काबू में करने में नाकाम रहा है

हाथियों को शिफ्ट करना उपाय नहीं 
हाथियों को शिफ्ट करना उपाय नहीं है। जिस तरह से उन्होंने 24 घंटे तक गणेश को बंधक बनाया वह गलत है। हाथियों को जंगल में कैसे रहना है, उन्हें मालूम है। पीसीसीएफ को सिखाने की जरूरत नहीं है। लोगों को भी समझना होगा की जंगल वन्य प्राणियों का है। विभाग दो हाथियों को खिला नहीं पा रहा है, इस तरह से पकड़कर उन्हें संरक्षित करने की बात समझ से परे हैं। – कस्तूरी बाला, पीएफए छत्तीसगढ़ प्रमुख

गणेश को कैद नहीं सुरक्षित कर रहे 
हम गणेश को कैद नहीं कर रहे हैं। बस उसे सुरक्षित कर रहे हैं। उसे हम नहीं पकड़ते तो वहां मौजूद ग्रामीण उसे बिजली का तार बिछाकर कर मार देते। हम उसे तमोर पिंगला ले जाकर सुरक्षित घने जंगल में छोड़ेंगे। रही बात केरल और छत्तीसगढ़ की तुलना की तो छत्तीसगढ़ में वाइल्ड एलिफेंट है। केरल में वाइल्ड कम और सेमी वाइल्ड एलिफेंट ज्यादा है‌ं इसलिए वहां इस तरह की समस्या कम है। – प्रणय मिश्रा, डीएफओ

हाथी की हिस्ट्रीशीट

नामगणेश
उम्र19 साल
वजन10 टन
लंबाई10 फीट
कामछाल के जंगल में दहशत
जुर्म10 से ज्यादा लोगों की हत्या
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