Thursday, September 23, 2021
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प्रतिक्रिया : परवेज मुशर्रफ को फांसी के फैसले से नवाज शरीफ के गांव वाले खुश, बोले-तानाशाह का यही अंजाम

पाकिस्तान की कोर्ट द्वारा वहां के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने के फैसले से भारत में खुशी की लहर है। यहां तरनतारन जिले में स्थित पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पैतृक गांव जाति उमरा के लोगों का कहना है कि वही हुआ, जो होना चाहिए था। एक तानाशाह का यही अंजाम होता है। विधानसभा हलका बाबा बकाला में स्थित गांव जाति उमरा की गलियों में नवाज शरीफ का बचपन बीता है। उनकी पुश्तैनी हवेली में इन दिनों गुरुद्वारा है और इसमें अक्सर लोग नवाज के लिए अरदास करते देखे गए हैं।

दरअसल, वर्ष 1999 में पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जरनल परवेज मुशर्रफ ने उस वक्त के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर देश निकाला दे दिया था। इसके बाद नवाज ने सऊदी अरब में शरण ली थी और पीछे से मुशर्रफ ने तख्तापलट कर पाक की सत्ता अपने हाथ ले ली थी। उस वक्त अगर नवाज शरीफ पर देशद्रोह साबित हो जाता तो उनके लिए भी सजा-ए-मौत तय थी। ऐसे में गांव जाति उमरा के लोगों ने गांव के गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ करके शरीफ के लिए लंबी उम्र की अरदास की थी। नवाज शरीफ के बीमार होने पर भी लोगों ने प्रार्थना की। अब जबकि नवाज के साथ धोखा करने वाले परवेज मुशर्रफ को कोर्ट ने फांसी की सजा का हुक्म सुनाया है तो ऐसे यहां नवाज के गांव के लोगों का कहना है कि नवाज शरीफ की सरकार को बर्खास्त करने और सुप्रीम कोर्ट के जजों को जेल में डालने वाले तानाशाह मुशर्रफ को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए थी।

गांव के सरपंच जसपाल सिंह की मानें तो पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को यहां कारगिल युद्ध का खलनायक माना जाता है। इसी तरह पूर्व सरपंच दिलबाग सिंह, जसबीर सिंह, बलजीत सिंह, बीरा सिंह का कहना है कि जैसे हालात मुशर्रफ ने नवाज शरीफ के लिए खड़े किए थे, वैसे ही अंजाम से अब उसे खुद गुजरना पड़ रहा है। गांव के लोग इस फैसले के समर्थन में हैं।

नंबरदार बंसा सिंह, स्वर्ण सिंह, शुबेग सिंह ने कहा, गांव के लोगों को वाहेगुरु पर भरोसा था कि देशद्रोह के मामले मुशर्रफ को फांसी की सजा होगी। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। पूर्व सैनिक गुरपाल सिंह ने कहा कि भारत पर कारगिल की जंग थोपने के पीछे परवेज मुशर्रफ का ही हाथ था। उस समय मैं कारगिल की चोटियों लड़ रहा था। अब मैं मुशर्रफ को सजा-ए-मौत की खबर से खुश हूं।

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