Friday, September 24, 2021
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लापरवाही – अजमेर में पॉइजन से पीड़ित मरीज का पेट साफ करने के लिए डॉक्टरों ने सीधे पानी की बोतल चढ़ाई

  • जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में पानी की बोतल से हो रहा मरीजों का गेस्ट्रिक लवाज
  • 4 महीने पहले भी लापरवाही की तस्वीर सामने आई थी; जूनियर डॉक्टरों को लगाई थी फटकार

अजमेर. यहां के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। एक महिला के शरीर से मंगलवार को विषाक्त पदार्थ को निकालने के लिए गेस्टिक लवाज (पेट साफ करने की विधि) करने की विधि ही बदल दी गई। डॉक्टरों ने सीधे पानी की बाेतल काे आईवी सेट (ग्लूकाेज के लगने वाली नली) से जोड़कर इलाज शुरू कर दिया। ऐसी स्थिति में संक्रमण का डर रहता है।

विशेषज्ञों की मानें तो पॉइजन से पीड़ित मरीजों के लिए ग्लूकोज की बोतल और कीप (गैस्टिक लवाज ट्यूब) का सहारा लेकर पेट की सफाई की जानी चाहिए थी। डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रक्रिया सार्थक है। इससे शरीर के अंदर जमा सभी विषाक्त कण बाहर निकल जाते हैं, क्योंकि जिस तेजी से पेट में पानी जाएगा, उसी तेजी से बाहर आएगा।

यहां ताे सीधे बाेतल ही लगा दी

मरीज के परिजन ने बताया यहां सीधे ही पानी की बाेतल लगा दी गई। ग्लूकोज की बाेतल में पानी डालने की बजाए आईवी सैट काे सीधे ही पानी की बाेतल के मुंह से जोड़कर उसे राइज टयूब में लगा दिया। इससे ग्लूकोज की तरह धीरे-धीरे पानी जा रहा था।

जूनियर अपना रहे शॉर्टकट

अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि अब तक सीनियर नर्सिंग स्टाफ इस विधि से ही उपचार करते आए हैं। मरीज का पेट साफ करने के लिए पानी की बोतल में सीधे ही आईवी सेट लगाकर पेट साफ किया जा रहा है। पानी की बोतल में प्रेशर इतना तेज नहीं आता इसी कारण कोई गारंटी नहीं की पेट पूरा साफ हुआ है।

ये है प्रकिया

  • मरीज का इलाज शुरू करने के लिए सबसे पहले पेट साफ किया जाता है ताकि शरीर के अंदर कोई विषाक्त के कण नहीं रहें।
  • पेट में ज्यादा पानी जाए इसके लिए कम से कम आठ से दस लीटर मिनरल वॉटर की बोतलें मंगाई जाती हैं।
  • पेट को साफ करने के लिए वैसे तो कीप विधि का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में एंडोस्कोपी की तरह मोटी नली मुंह के जरिए पेट में जाती है। पानी तेजी से पेट में जाने से विषाक्त के कण उलटी से बाहर आ जाते हैं, लेकिन कई बार उलटी ऑक्सीजन नली में जाने का डर रहता है। मरीज बार-बार पाइप निकालने पर सहयोग नहीं करता। इस कारण इसका उपयोग कम होता है।
  • गेस्टिक लवाज के लिए इन दिनों राइज ट्यूब के जरिए उपचार किया जाता है। मरीज की नाक में नली डालकर ग्लूकोज की खाली बोतल को काटकर स्टैंड पर लगाते हैं। खाली बोतल में तेजी से पानी नाक के जरिए पेट में डाला जाता है।
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