Monday, September 27, 2021
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जदयू : झारखंड में जीत का निशाना नहीं साध सका नीतीश का ‘तीर’, शून्य पर आउट; 40 सीटों पर लड़ा था चुनाव

पटना/रांची. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘तीर’ झारखंड के रण को नहीं भेद सका। सोमवार को आए झारखंड चुनाव परिणाम में नीतीश की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) शून्य पर आउट हो गई। झारखंड में 40 सीटों पर चुनाव लड़ी जदयू को सभी सीटों पर मुंह की खानी पड़ी। ज्यादातर सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। मझगांव से मैदान में उतरे प्रदेश अध्यक्ष सलखन मुर्मु चुनाव हार गए। जमशेदपुर सीट पर नीतीश ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ चुनाव लड़ रहे सरयू राय को बाहरी समर्थन दिया था। जदयू ने वहां अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया। भाजपा से सरयू राय का टिकट कटने पर नीतीश ने आश्चर्य भी जताया था।

2014 में भी नहीं खुला था खाता

झारखंड में ऐसा पहली बार नहीं है जब जदयू ने अपने दम पर चुनाव लड़ा हो। 2014 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने अपने दम पर चुनाव लड़ा था लेकिन तब भी यहां पार्टी का खाता नहीं खुला था। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि झारखंड में चुनाव प्रचार के लिए नीतीश का नहीं जाना भी एक बड़ा फैक्टर रहा। अगर नीतीश वहां प्रचार के लिए जाते तब पार्टी का खाता खुल सकता था। पार्टी जिस तरह चुनाव मैदान में उतरी उससे ऐसा लगा कि टीम बिना कप्तान के मैदान में खेल रही हो।

झारखंड में घटती चली गई जदयू की ताकत
साल 2000 में बिहार से अलग होने के बाद झारखंड में जदयू का बेहतर प्रदर्शन रहा है। 2005 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 18 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें 6 सीटों पर जीत मिली थी। वोट प्रतिशत 4 फीसदी रहा। एनडीए सरकार में जदयू की हिस्सेदारी थी। हालांकि, 2009 में वोट प्रतिशत और सीटों में भी गिरावट आई। भाजपा के साथ गठबंधन में जदयू को 14 सीटें मिली, जिस पर मात्र 2 सीटों पर पार्टी जीत दर्ज कर सकी। वोट भी घटकर 4 से 2.78 प्रतिशत रह गया।

जदयू के मुहिम पर फिरा पानी
जदयू बिहार की तर्ज पर ही इस बार झारखंड में जोर आजमाइश करने उतरी थी। पूरे राज्य में शराबबंदी और इस तरह के व्यापार से जुड़े लोगों को दूसरे रोजगार से जोड़ने का जिक्र घोषणा पत्र में किया गया था। नीतीश के करीबी आरसीपी सिंह, ललन सिंह, मंत्री नीरज कुमार, उद्योग मंत्री श्याम रजक, जहानाबाद से सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, विधायक वशिष्ठ सिंह समेत बिहार जदयू के कई बड़े नेता झारखंड में पार्टी की स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन चुनाव परिणाम ने बिहार से आगे जदयू के विस्तार पर ब्रेक लगाने जैसा काम किया। जदयू ने लक्ष्य रखा है कि अगले दो साल में पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाना है लेकिन इस परिणाम से पार्टी की मुहिम पर पानी फिर गया।

झारखंड चुनाव का बिहार में क्या होगा असर?
अगले साल बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले झारखंड चुनाव परिणाम भाजपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक शंभूनाथ सिन्हा का कहना है कि इस हार के बाद भाजपा नरम पड़ेगी। झारखंड में भाजपा का जो स्टैंड था कि किसी दल से गठबंधन नहीं करेंगे इसको झटका लगा है। भाजपा बिहार में ऐसा नहीं दोहराएगी और सहयोगी दल मजबूत रहेंगे। सीट शेयरिंग में भी सहयोगी दलों को इसका फायदा हो सकता है। हालांकि, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह यह पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी नीतीश के नेतृत्व में ही बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

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