Wednesday, September 22, 2021
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जोधपुर एयरपोर्ट : एयर इंडिया की वजह से ‘नो फ्लाइट डे’; 87 साल में पहली बार, न कोई फ्लाइट आई और न गई

जोधपुर : जोधपुर की एयर कनेक्टिवटी तमाम जद्दोजेहद एवं प्रयासों के बाद भी जमीन पर आ ही गई। हालांकि इस परिस्थिति को टालने के लिए एक माह तक कई प्रयास हुए। एक बार तो यह स्थिति टल भी गई थी। लेकिन एयर इंडिया की वजह से मंगलवार को ‘नो फ्लाइट डे’ हो ही गया। मुंबई के बाद दिल्ली की फ्लाइट भी हज की उड़ान के लिए लगाने से जोधपुर एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं उतरी।

संभवत: ऐसा पहला मौका

जोधपुर के एविएशन के 87 साल के इतिहास में संभवत: पहला मौका है, जब एक भी फ्लाइट जोधपुर से नहीं उड़ी। मौसम या तकनीकी खराबी के कारण पहले कुछ मौके पर फ्लाइट का संचालन नहीं हुआ था। लेकिन एयर इंडिया ने दोनों ही रूट की फ्लाइट का संचालन नहीं कर नो फ्लाइट डे बना दिया। ये सिलसिला 13 अगस्त तक जारी रहेगा जब हर मंगलवार व शनिवार को नो फ्लाइट डे होगा। हालांकि गत 2 जुलाई को ही ये स्थिति बन गई थी। उस समय केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीपसिंह पुरी से मिले थे। इसके बाद दिल्ली की फ्लाइट का संचालन जारी रहा था।

13 अगस्त तक ‘नो फ्लाइट डे’ की स्थिति
2 जुलाई से मुंबई की फ्लाइट को सप्ताह में तीन दिन मंगल, गुरु व शनिवार को हज के लिए लगाई। तब दिल्ली की फ्लाइट भी सप्ताह में दो दिन हज यात्रा में लगानी थी। लेकिन एयर इंडिया ने निर्णय टाल दिया था। अब मंगलवार से दिल्ली की फ्लाइट को दो सप्ताह में मंगलवार व शनिवार को हज के लिए लगाया। इससे 30 जुलाई, 3 अगस्त, 6 अगस्त, 10 अगस्त व 13 अगस्त को फ्लाइट नहीं आएगी। वहीं मुंबई रूट की फ्लाइट 14 सितंबर तक सप्ताह में तीन दिन नहीं आएगी। नो फ्लाइट डे पर यहां कार्यरत अफसर व कार्मिक ही ड्यूटी के लिए पहुंचे। एयरपोर्ट परिसर सूना रहा। जोधपुर एयरपोर्ट निदेशक जीके खरे का कहना है कि एयर इंडिया की फ्लाइट के नहीं आने के कारण नो फ्लाइट डे की स्थिति बनी। मेरे कैरियर में किसी भी एयरपोर्ट पर इस तरह के हालात पहली बार देखे हैं।

 

हाईकोर्ट ने एयर इंडिया से मांगा जवाब
हाईकोर्ट के न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व विनीत कुमार माथुर ने मौखिक रूप से एयर इंडिया से पूछा कि जोधपुर में सप्ताह में पांच दिन फ्लाइट चल रही है, बाकी दिन क्यों नहीं। एयर इंडिया की ओर से बताया गया कि हज का सीजन चल रहा है, इसलिए हज के लिए फ्लाइट गई हुई हैं। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, कि जहां एक ही फ्लाइट है, वहां से क्यों लगाई। जहां ज्यादा फ्लाइट होती है, वहां से लगाते। यहां तो नो फ्लाइट ही हो गया, यह तो गलत है। तब बताया कि यह जनरल मैनेजर आदि तय करते हैं।

 

समृद्ध अतीत, वर्तमान खराब

  • जोधपुर में 1931 में फ्लाइंग क्लब बना। पहला वीटी एबीवी विमान क्रोयडॉन से महाराजा उम्मेदसिंह लेकर आए थे।
  • 1936 में इंटरनेशनल उड़ानें शुरू। इंडियन ट्रांस कांटीनेंटल एयरवेज, एयर फ्रांस व डीकेएलएम की उड़ाने रंगून से पेरिस तक चलीं।
  • 1942 में जोधपुर एयरबेस द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों के विमानों ने 1063 उड़ानें भरी।
  • 1945 में 40 टाइगर मोथ व 1 हार्वर्ड से 1230 उड़ानें।
  • आजादी के बाद निजी विमानों का संचालन जारी रहा।
  • 1967 में और 60 में जाम एयरवेज का दिल्ली तक संचालन।
  • 1982 से 84 तक अशोक गहलोत केंद्र में उप मंत्री सिविल एविएशन रहे। इस दौरान छोटी टर्मिनल बिल्डिंग बनी।
  • 1998 से 2003 तक मौजूद टर्मिनल बिल्डिंग बनी, एयर इंडिया या इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट का संचालन जारी रहा।

 

10 साल में 30% ग्रोथ, 4 लाख यात्री बढ़े, जरूरत 26 फ्लाइट की है

एक दशक में जोधपुर की के हवाई यात्रियों की संख्या 5 लाख को पार कर गई, जो सालाना 30 फीसदी की ग्रोथ रेट से ज्यादा हैं। इस ग्रोथ के अनुसार जोधपुर एयरपोर्ट को रोजाना 26 से ज्यादा अप डाउन की फ्लाइट्स की जरूरत है। जोधपुर एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन होने के साथ ही हैंडीक्राफ्ट, एजुकेशन सहित अन्य कई क्षेत्रों का बड़ा केंद्र बन गया है। सी.एन.२४  ने हर फील्ड की स्थिति का अध्ययन किया। हमने जाना कि क्यों इन सबके तथा शहर के विकास के लिए फ्लाइट्स बढ़ाने की सख्त आवश्यकता है।

 

  • एज्युकेशन: आईआईटी, एम्स, डिफेंस लेब, एनएलयू जैसे बड़े 10 संस्थान। विशेषज्ञों के लिए देश भर से कनेक्टविटी की जरूरत बताई
  • इंडस्ट्री: दो हजार करोड़ की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री, स्टील पाटा पट्‌टी का हर माह तीस हजार टन का उत्पादन, ग्वारगम, टैक्सटाइल, मिनरल्स
  • टूरिज्म: सालाना 10 लाख देसी व विदेशी पर्यटक, 400 से ज्यादा सभी श्रेणी के होटल्स, गेस्ट हाउस, सेलिब्रिटी शादियां का स्थल।
  • रिफाइनरी: पचपदारा में रिफाइनरी, बाड़मेर, जैसलमेर व जालोर में तेल गैस के नए सेक्टर मिले
  • ऊर्जा: जोधपुर व जैसलमेर विंड मिल के बाद अब सोलर हब बन गया जोधपुर, देश विदेश से लोग आते है
  • डीएमआईसी: दिल्ली मुंबई इंड्रस्टियल कॉरिडोर आने वाले सालों में जोधपुर एक नोड के रूप में विकसित होगा

 

फ्लाइट कम होने के साइड इफैक्ट

  • फ्लाइट कम होने से जोधपुर आने वाले हैंडीक्राफ्ट बायर्स या टूरिस्ट का दो दिन का औसत खर्च 70 हजार से ज्यादा। इसमें टिकट सबसे महंगा।
  • जोधपुर आने वालों पर्यटकों की प्लान बुकिंग होती है, जो छह माह पहले ही फ्लाइट व होटल बुक करवाते हं। फ्लाइट नहीं मिलने से इनकी संख्या घटेगी।
  • फ्लाइट कनेक्टिविटी कम होने से आने वाले टूरिस्ट की संख्या घटेगी। इस पर बड़ी अर्थव्यवस्था निर्भर।
  • होटल बिजनेस पर बुरा असर पड़ रहा। बड़े ग्रुप के जोधपुर से खिसकने की संभावना
  • जैसलमेर में रोजाना 4 फ्लाइट, उदयपुर में 30 से ज्यादा रोजाना फ्लाइट। जोधपुर में ऐसे ही हालत रहे तो यहां पर फ्लाइट व यात्री बढ़ेंगे

 

एक दशक में  में 5 गुना तक बढ़े यात्री 

वर्षयात्री
200893764
20091.47
20102.09
20112.16
20122.25
20132. 30
20142.37
20153.14
20163.44
20174.60
20185.01
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