Monday, September 20, 2021
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CM सहित किसी मंत्री ने सार्वजनिक नहीं की संपत्ति

 

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने हुए ढाई साल से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर किसी भी मंत्री की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। मंत्रियों के लिए तय आचार संहिता में ऐसा करना जरूरी है। इस बार इसे भुला दिया गया है। गृह मंत्रालय से तय मंत्रियों की आचार संहिता में साफ प्रावधान है कि हर साल मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री अपनी संपत्ति और लेनदारी-देनदारी का ब्योरा सार्वजनिक करेंगे। पारदर्शिता के लिए ऐसा करना जरूरी है। बहुत से राज्यों में हर साल मुख्यमंत्री-मंत्री अपनी संपत्ति बना रहे हैं। राजस्थान में इस ढिलाई से पारदर्शिता के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

ज्यादातर मंत्रियों ने पूछने पर यह तर्क दिया कि उनकी तरफ से संपत्ति का ब्योरा हर साल सीएमओ को भेज दिया जाता है। आंतरिक व्यवस्था के हिसाब से मं​त्रियों ने सीएम को भले ही अपनी संपत्ति का ब्योरा दे दिया हो, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। इसे सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की वेबसाइट पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध करवाना जरूरी होता है, तभी संपत्ति सार्वजनिक मानी जाती है। जीएडी की वेबसाइट पर केवल पूर्व मंत्रियों की संपत्ति का हाइपर लिंक दिया हुआ है। नए मंत्रियों की संपत्ति के ब्योरे पर हाइपर लिंक तक नहीं है।

2018 के चुनाव एफि​डेबिट के बाद जनता के सामने मंत्रियों की सपंत्ति का ब्योरा

सीएम और मंत्रियों की सपंत्ति, लेनदारी-देनदारी के बारे में आखिरी बार सार्वजनिक जानकारी 2018 में विधानसभा चुनाव लड़ते वक्त दिए शपथ पत्र में ही दी थी। वह एफि​डेबिट ही नेताओं की संपत्ति के बारे में सार्वजनिक जानकारी का सोर्स है।

मंत्रियों के लिए तय आचार संहिता में अनिवार्य है हर साल संपत्ति का ब्योरा देना

देश भर में मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के लिए आचार संहिता बनी हुई है। उस आचार संहिता में मंत्रियों के लिए हर साल संपत्ति का ब्योरा देना जरूरी होता है। आचार संहिता के मुताबिक मंत्रियों पर व्यापार करने और संपत्ति अर्जित करने पर कई पाबंदियां हैं।

बीजेपी ने पूरे पांच साल निकाल दिए, गहलोत राज का आधा कार्यकाल गया

मंत्रियों की संपत्ति सार्वजनिक करने की आचार संहिता का पालन गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में पूरे पांच साल हुआ था। 2009 से 2013 तक हर साल मंत्रियों की संपत्ति जीएडी की वेबसाइट पर अपलोड की जाती थी। 2013 में वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार सत्ता में आई। बीजेपी राज में पूरे पांच साल तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे सहित किसी मंत्री ने संपत्ति सार्वजनिक नहीं की, अब उसी राह पर गहलोत सरकार है।

बिहार, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में हर साल सपंत्ति सार्वजनिक कर रहे मंत्री

मंत्रियों की संपत्ति सार्वजनिक करने में बिहार जैसे राज्य का ट्रैक रिकॉर्ड राजस्थान से अच्छा है। बिहार में हर साल मुख्यमंत्री और मंत्री संपत्तियों का ब्योरा सार्वजनिक कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भी इसका पालन हो रहा है। राजस्थान में पिछले साढ़े सात साल से मंत्रियों की संपत्ति सार्वजनिक करने से लगातार परहेज किया जा रहा है।

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