Tuesday, September 28, 2021
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सिविल के 50 प्रोफेसर सहित 1050 स्टाफ कोरोना ड्यूटी से मुक्त, कल से शुरू होगी ओपीडी

घटते कोरोना मरीजों से सिविल अस्पताल की स्थिति सामान्य हो गई है। 60% स्टाफ कोरोना की ड्यूटी से मुक्त हो गए हैं। मंगलवार से सामान्य ओपीडी शुरू कर दी जाएगी। अभी पहली पाली में सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक ओपीडी शुरू होगी। इससे कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों के 2000 मरीजों को रोज इलाज मिल सकेगा।

  • प्लांड ऑपरेशन के साथ मिकोर माइसिस के इलाज की भी तैयारी
  • अभी सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक ही ओपीडी

प्लांड ऑपरेशन और मिकोर माइसिस के इलाज की भी तैयारी की जा रही है। कांट्रेक्ट पर लिए गए स्टाफ को पूरी तरह कोरोना की ड्यूटी दी जाएगी, क्योंकि उनकी ट्रेनिंग इसी के लिए हुई है। उनका कांट्रेक्ट भी मात्र तीन माह का है।

ओपीडी में संबंधित विभाग के ही डॉक्टर होंगे। सिविल अस्पताल में करीब 300 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर, 50 से अधिक प्रोफेसर, 300 से अधिक नर्सिंग स्टाफ, 400 तक वर्ग चार के कर्मचारी अब ओपीडी के लिए तैयार हैं। कोरोना मरीजों के इलाज के लिए 40 फीसदी स्टाफ काफी है। मार्च में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद सिविल अस्पताल की ओपीडी बंद कर दी गई थी।

योजना: 60% स्टाफ फ्री, 40% ही कोरोना ड्यूटी करेंगे

डाॅ. धारित्री परमार ने बताया कि आम दिनों में दो मीटिंग ओपीडी चलती थी, लेकिन अभी सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक एक मीटिंग ही ओपीडी शुरू करेंगे। प्लांड ऑपरेशन की भी तैयारी की जा रही है। मिकोर माइसिस का भी इलाज शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। निजी अस्पतालों में इसका इलाज शुरू हो चुका है, लेकिन बहुत महंगा है। जिसके कारण बहुत से लोग इसका इलाज नहीं करवा पा रहे हैं।

कोरोना के मरीज कम हो गए हैं। हमारा 60% स्टाफ फ्री हो गया है। हमने मंगलवार से सामान्य ओपीडी शुरू करने की तैयारी की है। दो से तीन विशेषज्ञों की टीम बनाकर उनके ही गाइडेंस में कोरोना मरीजों को इलाज दिया जाएगा। अन्य बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। हमें उनका भी ध्यान रखना है। मिकोर माइसिस का भी इलाज हम शुरू करने का विचार कर रहे हैं।

ओपीडी के मरीजों को यह जानना जरूरी

1 सामान्य बीमारियों के मरीजों को केस पेपर निकलना होगा। 2 सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के साथ ओपीडी में एंट्री मिलेगी। 3 एक बार में डॉक्टर के पास एक ही मरीज जाएगा। 4 दवा, एक्सरे, सोनोग्राफी, ब्लड टेस्ट आदि की सुविधा भी मिलेगी। 5 ओपीडी में सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक ही होगा इलाज

अब सिविल में कोरोना के सिर्फ 500 मरीज भर्ती हैं

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आगामी माह से बारिश का माैसम शुरू होने वाला है। बारिश में डेंगू, मलेरिया, डायरिया और वायरल फीवर जैसी बीमारियों के हजारों मरीज रोज सिविल आते हैं। कोरोना के पहले अप्रैल-मई और जून-जुलाई में ओपीडी में रोज 4 हजार से अधिक मरीज आते थे।

10 दिन पहले सिविल अस्पताल में कोरोना के इतने मरीज हो गए थे कि ऑक्सीजन और स्टाफ की समस्या के कारण मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया गया था। अब हालात सुधर गए हैं। इस समय सिविल में कोरोना के मात्र 500 मरीज भर्ती हैं।

रोज 150 बसें उत्तर प्रदेश जा रही हैं सूरत के एक बड़े टूर ऑपरेटर ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से झांसी के नजदीक यूपी-एमपी बॉर्डर बंद है। इससे कानपुर और प्रयागराज जाने वाली बसों को अब सूरत-अहमदाबाद-जयपुर-आगरा-फतेहपुर रूट से चलाया जा रहा है। जबकि बॉर्डर बंद होने से पहले इन बसों को सूरत से इंदौर-उरई होते हुए चलाया जाता था। गुजरात से जयपुर होकर यूपी के लिए रोजाना करीब 150 बसें रवाना हो रही हैं। ट्रेनों में भारी वेटिंग से लोग बस से जा रहे हैं।

9 घंटे इंतजार करने के बाद मिली यूपी की बस यूपी जाने के लिए सूरत-अहमदाबाद से रविवार को आठ बसें जयपुर में पहुंचीं। इन बसों में करीब 700 यात्री सवार थे। बस ऑपरेटर ने उन्हें जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड के पास उतार दिया और कहा कि ये बसें आगे नहीं जाएंगी, यूपी जाने के लिए दूसरी बसों की व्यवस्था कर रहे हैं। यह सुनकर यात्री टूर ऑपरेटर्स पर भड़क गए, क्योंकि उन्हें गुजरात में बस ऑपरेटर ने कहा था कि सभी यात्रियों को जयपुर-आगरा के रास्ते कानपुर ले जाया जाएगा।

चालक ने नहीं बताया जयपुर में क्यों उतारा

बस के यात्री राम कुमार ने बताया कि हम कुल चार लोग कानपुर जाने के लिए बस में बैठे थे। हमसे कुल 6 हजार रुपए किराया लिया गया और यह कहा गया कि बस सीधे कानपुर जाएगी। बस जब जयपुर पहुंची तो हमें उतार दिया गया और कहा गया कि बस आगे नहीं जाएगी। अाप लोगों को दूसरी बस से जाना होगा। उसके बाद दूसरी बस 9 घंटे बाद मिली। बस संचालक ने हमें यह नहीं बताया कि बस को जयपुर में क्यों रोक दिया।

सूरत से चले 23 घंटे हो गए, जयपुर में उतारा, पता नहीं घर कब पहुंचेंगे

यात्री विकास कुमार ने बताया कि घर पर मां बीमार हैं। ट्रेन का तत्काल टिकट नहीं मिला इसलिए बस से टिकट लिया। हमें जयपुर में उतार दिया गया। सूरत से रवाना होने के बाद अब तक 23 घंटे बीत चुके हैं। घर कब पहुंचेंगे कुछ पता नहीं।

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