Tuesday, September 28, 2021
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CM आवास के बाहर धरने पर बैठे पैरालिंपिक खिलाड़ी

पंजाब के नेशनल और इंटरनेशनल पैरालिंपिक खिलाड़ी सरकारी नौकरी नहीं मिलने के रोष में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के सरकारी आवास के सामने अपने मेडल्स और अवॉर्ड्स के साथ धरने पर बैठे हैं। इस दौरान खिलाड़ी पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस प्रशासन ने इस बारे में CM के OSD संदीप सिंह बराड़ से बात की है। खिलाड़ियों का कहना है कि हमें बताया जाए कि हमारे साथ कब न्याय होगा। खिलाड़ी आंदोलन तेज करने की तैयारी में भी हैं। उनका कहना है कि एक ओर पंजाब सरकार घर-घर रोजगार देने की बात करती है और दूसरी ओर हमारी नौकरी की बात आती है तो सरकार खजाने की बात करती है। अगर हमारी मांगे समय रहते पूरी न की गईं, तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे। हम CM से मिलना चाहते हैं। मौके पर पुलिस फोर्स भी तैनात है और बैरिकेडिंग भी की गई है, हालांकि खिलाड़ी शांतिपूर्वक ही प्रोटेस्ट कर रहे हैं। बता दें कि 25 अगस्त को टोक्यो पैरालंपिक शुरू होने से ठीक एक दिन पहले वे सड़क पर उतरे हैं।

सीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे पैरालिंपिक खिलाड़ी।
सीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे पैरालिंपिक खिलाड़ी।

क्या हुआ CM के आदेश का ?

खिलाड़ियों ने बताया कि 4 जून को जब उन्होंने CM के सरकारी आवास के सामने धरना दिया था, तो CM ने VC के माध्यम से बात कर अगली कैबिनेट मीटिंग में खेल मंत्री को देश और राज्य का नाम रोशन करने वाले पैरा खिलाड़ियों को नौकरी देने के लिए नई खेल नीति लाने के लिए निर्देश दिए थे। लेकिन 16 अगस्त को हुई कैबिनेट मीटिंग में खेल मंत्री और खेल निदेशक ने पैरा खिलाड़ियों की नौकरी के लिए कोई भी खेल नीति पेश नहीं की। इसके अलावा उस लिस्ट पर भी कोई फैसला नहीं किया गया, जिसमें 14 खिलाड़ियों के नौकरी के लिए नाम दिए गए थे।

इस बारे में OSD संदीप सिंह बराड़ ने बताया कि उन्होंने इस बारे चीफ सेक्रेटरी (CS) को प्रस्ताव भेजा था जिसे उन्होंने यह कहकर नजरअंदाज कर दिया कि खिलाड़ियों को नौकरी देने के लिए सरकारी खजाने में पैसा नहीं है।

छलका खिलाड़ी का दर्द

पैरा एथलीट संजीव कुमार ने कहा कि हम तो सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर हैं। सरकार ने अपने विधायकों के बेटों को और टिकटॉक स्टार गुरनूर के पिता को नौकरी देने में बिल्कुल देर नहीं की और हमारी बारी आते ही खजाने खाली हो गए। उन्होंने कहा कि हरियाणा और राजस्थान सरकार की तर्ज पर पंजाब सरकार खिलाड़ियों को नौकरी देने के लिए खेल पॉलिसी में बदलाव करके एक बराबर सम्मान देने की परंपरा बनाए।

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