Sunday, September 26, 2021
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देश को आजादी मिलने की खुशी में रोपा गया था पीपल का पौधा

आज पूरा देश 75वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मना रहा है और इसे अमृत महोत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इस आजादी को याद कराने वाली कुछ ऐसी विरासते हैं जो आज भी कायम हैं और आजादी के उन पलों को याद दिलाती हैं। ऐसी ही एक विरासत दमोह जिले की जनपद पंचायत जबेरा की ग्राम पंचायत घटेरा में है। जहां 75 साल पहले देश को आजादी मिलने की खुशी में ग्रामीणों ने पीपल का पौधा रोपा था तो आज वही पीपल का पौधा वृक्ष बनकर खड़ा है और देश की आजादी की याद दिला रहा है। 15 अगस्त 1947 को जब देश को आजादी मिली, उसी दिन घटेरा रेलवे स्टेशन में आजादी का जश्न मनाते हुए पीपल का पौधा रोपकर तिरंगा फहराया गया था। उस दिन यहां पर पूरा गांव एकत्रित हुआ था और ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय गान गाया गया था। साल दर साल बीत गए और यह पीपल का पौधा आज विराट रूप लिए खड़ा है। कटनी-दमोह रेल सेक्शन के रेलवे स्टेशन घटेरा के कार्यालय और व्यारमा नदी पर बने रेलवे पुल के बीच चंडी माता मंदिर के समीप 75 साल पहले इसी पीपल के पौधा को रोपकर, उसी पौधे के समीप एक लकड़ी को लगाया और उस पर तिरंगा फहराया था।घटेरा में था अंग्रेजों का आशियाना

1932 में जन्में ग्रामीण और रेलवे में कार्यरत रहे 90 वर्षीय सुल्तान सिंह ने बताया कि घटेरा में भी अंग्रेज रहा करते थे। जब देश आजाद हुआ तो वो यहां से चले गये और देश को आजादी मिलने की खुशी में ग्रामीणों ने पीपल का पौधा रोपा था। उन्होंने बताया कि आज लोग उस अविस्मरणीय पल को भूल गए हैं। गांव के अनेक उम्र दराज लोग बताते हैं कि आज भी उस दिन को याद कर आंख में आंसू छलक आते हैं, जब पहली बार देश की आन-बान-शान कहे जाने वाले तिरंगे झंडे को यहां फहराया गया था। आजादी के बाद यहां गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा झंडा फहराया जाता था, लेकिन आज इस ओर किसी का ध्यान ही नहीं है। 1935 में जन्मे गांव के बुजुर्ग जगन्नाथ सिंह लोधी ने बताया कि आजादी मिलने के बाद वह लोग स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण करने आते थे, लेकिन नई पीढ़ी में यह प्रथा बंद हो गई और अब सिर्फ यादें ही शेष हैं।

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