Sunday, September 19, 2021
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हेटस्पीच केस: सोनिया-राहुल-प्रियंका-अकबरूद्दीन के खिलाफ याचिका, सुनवाई आज

  • हिंदू सेना ने दायर की याचिका
  • एसआईटी बनाने की है मांग

दिल्ली हाई कोर्ट में आज हेट स्पीच के एक और मामले में सुनवाई होगी. हिंदू सेना की ओर से दायर याचिका में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, आम आदमी पार्टी (आप) नेता मनीष सिसोदिया और अमानतुल्लाह खान, एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी और वारिस पठानके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मनीष सिसोदिया, अमानतुल्ला खान, अकबरुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान पर भड़काऊ बयान देने के मामले में एफआईआर दर्ज की जाए. हिंदू सेना के अलावा लॉयर्स वॉयस ने भी याचिका दाखिल की है. उन्होंने कहा कि इन बयानों की जांच के लिए एसआईटी गठित कर उचित कार्रवाई की जाए.

बीजेपी नेताओं के खिलाफ दायर हुई थी याचिका

इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेताओं कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने पर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई की मांग की थी.

सरकार बोली- अभी कार्रवाई का माहौल नहीं

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान बीजेपी नेताओं के साथ बाकी दलों के नेताओं पर भी कार्रवाई की मांग उठी थी. दरअसल, इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जब कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अभी इस मामले में किसी के खिलाफ एफआईआर करना माहौल को बिगाड़ने वाला होगा, इसीलिए फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और आगे दोषी लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

FIR दर्ज करने में हिचक रही है सरकार

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के यह बोलने के बाद इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हो रहे वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि अगर कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस एफआईआर दर्ज करने में हिचकिचाहट है तो उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ये सभी सरकार का हिस्सा है और मिनिस्टर तक हैं.

बीजेपी नेताओं पर ही कार्रवाई क्यों

कॉलिन गोंजाल्विस के इस बयान के बाद कोर्ट रूम में मौजूद हिंदू महासभा के वरुण सेना ने बोला कि इस याचिका में बीजेपी के नेताओं का नाम क्यों लिया गया है. क्या लोगों ने टीवी पर असदुद्दीन ओवैसी और वारिस पठान के बयान को नहीं देखा है. उनके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं होनी चाहिए. इस याचिका में उन पर एफआईआर करने की बात क्यों नहीं कहीं की गई है?

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