Sunday, September 26, 2021
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जयपुर : फिल्म कबीर सिंह देखने एप से आधार कार्ड की फोटो और जन्मतिथि बदल रहे हैं नाबालिग

जयपुर. शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म कबीर सिंह को देखने के लिए नाबालिग अपने आधार कार्ड पर उम्र से छेड़छाड़ कर रहे हैं। सिनेमा हॉल में यह फिल्म सुपरहिट चल रही है, लेकिन फिल्म सेंसर बोर्ड ने इसे ‘ए’ सर्टिफिकेट यानी वयस्क प्रमाण पत्र दिया है। ऐसे में 18 साल से कम उम्र के लोग फिल्म नहीं देख सकते हैं।

थिएटर में किसी ने हमसे नहीं पूछा

  1. ताजा मामला जयपुर में सामने आया है। यहां के एक नाबालिग ने फिल्म देखने के लिए आधार कार्ड की तस्वीर और जन्मतिथि को मोबाइल एप पर एडिट कर दिया। इसके बाद उसे थिएटर के गेट पर किसी ने नहीं रोका।
  2. जयपुर में ही एक अन्य युवा ने बताया कि उसने बुक माई शो से कई टिकट बुक करवाए और उसमें किसी ने भी उम्र या पहचान पत्र के बारे में नहीं पूछा। उसने बताया कि सिनेमा हॉल के गार्ड ने रोका तो हमने अपने स्मार्टफोन से आधार कार्ड की तस्वीर ली, जन्मतिथि को बदला और एप की मदद से मिनट में ही एडल्ट बन गए।
  3. इस बारे में टिकट बुकिंग वेबसाइट ‘बुक माई शो’ के अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि टिकट बुक करने के दौरान हमारी साइट पर एक पॉप-अप दिखाई देता है जो यह कहता है कि 18 साल से कम उम्र के लोग ए-रेटेड फिल्म नहीं देख सकते, लेकिन लोग इस पॉप-अप को अनदेखा कर देते हैं और टिकट बुक करते हैं। चूंकि यह ऑनलाइन ट्रांजेक्शन है, इसलिए हम उनके पहचान पत्र नहीं मांगते।
  4. ए-रेटेड फिल्मों के लिए टिकट पर लगाते हैं लाल रंग की मुहर

    • आईनॉक्स मुंबई के अधिकारी ने इस बात को स्वीकार किया, “मल्टीप्लेक्स चेन कबीर सिंह के मामले में चुनौती का सामना कर रही है, क्योंकि बड़ी संख्या में किशोर यह फिल्म देखने आ रहे हैं। जब कोई ग्राहक ए-रेटेड फिल्म के बारे में पूछताछ करता है, तो हम साफ तौर पर बता देते हैं कि केवल 18 साल से बड़ी उम्र के लोग ही इसे देख सकते हैं।”
    • “हम ए-रेटेड फिल्मों के लिए टिकट पर एक लाल रंग की मुहर भी लगाते हैं। हालांकि, इन सावधानियों के बाद भी नाबालिग तकनीक की मदद से कबीर सिंह को देखने के लिए दीवानगी की सारी हदें पार कर रहे हैं।”
  5. मनोवैज्ञानिक, डॉ. अनामिका पालीवाल ने बताया, “फिल्म में नायक कबीर सिंह की किसी चीज को पाने की तीव्र इच्छा के बारे में दिखाया गया है, जिसे युवाओं द्वारा सराहा जा रहा है। लेकिन युवाओं को अनावश्यक महिमामंडन के नकारात्मक प्रभाव से बचने की जरूरत है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे दिमाग का इस्तेमाल किए बगैर देखा जाना चाहिए और इसके खत्म होने के बाद इसे भूल जाना चाहिए। अगर हम इसे हमारी जिंदगी में लागू करेंगे तो हम राह से भटक जाएंगे।”
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