Tuesday, September 28, 2021
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वसुंधरा और कृषि कानून को लेकर राजस्थान में भाजपा और आरएलपी के बीच बढ़ी तकरार, मुश्किल दौर में गठबंधन

हनुमान बेनीवाल और सतीश पूनियां।
  • पूनियां: अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने पर पहले भी बेनीवाल को किया था आगाह
  • बेनीवाल: कुछ बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस की सरकार बचाई थी, किसानों पर चुप कैसे रहूं

 लाेकसभा चुनाव-2019 में शुरू हुआ बीजेपी और आरएलपी का गठबंधन खत्म हाेने की कगार पर है। आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सहित कई बीजेपी नेताओं के खिलाफ बाेल रहे हैं। नरेंद्र माेदी सरकार की ओर से लाए गए कृषि कानून काे वापस लेने की मांग की है। ऐसा न करने पर एनडीए से अलग हाेने की चेतावनी दी है। इसकाे लेकर  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल का इंटरव्यू किया। किसने क्या कहा, आप भी पढ़िए

वसुंधरा राजे के खिलाफ बाेलने वाले और एनडीए से गठबंधन ताेड़ने की धमकी देने वाले हनुमान बेनीवाल काे प्रदेश भाजपा किस रूप में ले रही है?

जवाब: हम जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहते हैं। क्या बात हुई किसने क्या कहा है, इसकी पड़ताल के बाद ही कुछ बाेलना उचित हाेगा। बेनीवाल का गठबंधन केंद्रीय स्तर पर हुआ है। आलाकमान का जाे भी दिशा-निर्देश हाेगा, उसे फाॅलाे करेंगे। अमर्यादित भाषा का उपयोग करने पर हमने पूर्व में भी बेनीवाल काे आगाह किया था। तब उन्होंने आश्वासन भी दिया था कि वह आगे से ऐसी बात करने से परहेज करेंगे।

क्या आप बेनीवाल के खिलाफ केंद्रीय नेतृत्व काे काेई अपनी रिपोर्ट भेजी है या भेजेंगे?

जवाब : बेनीवाल ने शुरुआती दाैर में कृषि बिल का समर्थन किया था। अब विरोध कर रहे हैं। यह उनकी व्यक्तिगत साेच है। उनके आचरण काे लेकर तथ्य की जांच करके केंद्रीय संगठन काे रिपाेर्ट करेंगे।

बेनीवाल बीजेपी के सामने पंचायत चुनाव में प्रत्याशी खड़ा कर रहे हैं, फिर भी बीजेपी की क्या मजबूरी है जो उनके साथ गठबंधन कर रखी है?

जवाब: बेनीवाल काे लेकर काेई मजबूरी नहीं है। ये बात केंद्रीय संगठन तक पहुंच चुकी है। ऐसे में अंतिम निर्णय और दिशा-निर्देश का इंतजार है।

बेनीवाल कह रहे हैं कि सियासी संकट के समय बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस की मदद की थी?

जवाब: इन बाताें में काेई दम नहीं है।

बेनीवाल को हैसियत नापनी है तो इस्तीफा दें और चुनाव लड़ें: सिंघवी

छबड़ा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने भी बेनीवाल पर पलटवार किया है। कहा कि वे छठी बार विधायक हैं। 1985 में जब पहली बार विधायक बने थे, तब बेनीवाल 13 साल के थे। बेनीवाल को राजनीतिक हैसियत नापने का इतना ही शौक है तो उन्हें सांसद पद से इस्तीफा देकर अपने बूते नागौर से चुनाव लड़ना चाहिए।

वसुंधरा राजे के बारे में अनर्गल बातें करते हैं। आरोप लगाया कि बेनीवाल के खिलाफ बयान देने पर मुझे जान से मारने की धमकी मिली है। गुरुवार को मोबाइल नंबर 7018915496 से कॉल आया। बात करने वाले ने खुद को बेनीवाल का समर्थक बताते हुए कहा कि उन्होंने उनके नेता के खिलाफ बयान क्यों दिया। इसका नतीजा अच्छा नहीं होगा।

बीजेपी में बेनीवाल का विरोध शुरू हाे गया है, ऐसे में आप क्या करेंगे?
जवाब: मैंने गठबंधन कांग्रेस काे खत्म करने के लिए किया था। मेरा विरोध करने वाले सिर्फ वसुंधरा खेमे के लाेग हैं। जिनका खुद का काेई राजनीतिक वजूद नहीं है। बहरहाल गठबंधन मैंने राष्ट्रहित में पीएम नरेंद्र माेदी के चेहरे काे देखते हुए किया है। प्रदेश के नेताओं से नहीं। बीजेपी के नेताओं ने सियासी संकट के समय सीएम अशाेक गहलाेत की खुलकर मदद की थी। उस समय आरएलपी के विधायक बीजेपी के साथ खड़े थे।

पीएम माेदी ने आपकाे मंत्री नहीं बनाया? क्या इसलिए आप कृषि बिल का विराेध करने के लिए सामने आए?

जवाब : मैं माेदी सरकार के हर बिल के पक्ष में हूं, लेकिन कृषि बिल काे लेकर शुरू से ही विरोध में रहा हूं। मैंने पहले भी कहा था कि बगैर शर्त के बीजेपी से गठबंधन किया था।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि हनुमान बेनीवाल नागाैर से सांसद सिर्फ बीजेपी की बदाैलत बने हैं, गठबंधन नहीं हाेता ताे नहीं बनते?

जवाब : बीजेपी ने 16 लाेकसभा सीटें राजस्थान में मेरी बदौलत जीती थी। ऐसे में मुझसे आज इस्तीफा ले लीजिए, लेकिन 16 सीटाें पर भी इस्तीफे कराकर दाेबारा चुनाव करा लीजिए, तब पता चलेगा किसमें कितनी ताकत है।

बीजेपी के खिलाफ प्रत्याशी भी उतारे हैं और गठबंधन भी रखे हुए हाे, ऐसा क्याें?

जवाब: आरएलपी किसानों और जवानों की पार्टी है। हम सिर्फ इतना ही चाहते हैं कि केंद्र कृषि बिल वापस लिए जाएं।

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