Friday, September 17, 2021
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नागरिकता कानून : उत्तर प्रदेश में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने भड़काई हिंसा, 13 राज्यों में सक्रिय ये संगठन, पांच गिरफ्तार

लखनऊ. नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदेशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) का नाम सामने आया है। इस मामले में लखनऊ पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा है। शामली में भी इस संगठन से जुड़े दो आरोपी पकड़े गए हैं, जबकि तीन वांछित हैं। रविवार को उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा था कि, हिंसा में पीएफआइ का हाथ दिख रहा है। यह प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया का लघु रूप है।

एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि, ये संगठन 13 राज्यों में सक्रिय हैं। शामली, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, आजमगढ़ जैसे जिलों में ये अपनी पहुंच बना रहे थे।

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर 19 दिसंबर को राजधानी लखनऊ में हुए बवाल के मुख्य आरोपी नदीम को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया है। नदीम बाराबंकी जिले का रहने वाला है। पुलिस ने नदीम के दो साथी वसीम और अशफाक को पकड़ा है। नदीम को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सदस्य बताया जा रहा है, जबकि वसीम पीएफआई का प्रदेश अध्यक्ष और अशफाक कोषाध्यक्ष हैं। आरोप है कि पीएफआई ने ही विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को उकसाया, जिसके बाद भड़की हिंसा में कई वाहनों को आग लगा दी गई और जमकर तोड़फोड़ हुई।

एसएसपी ने बताया कि, बताया कि, इनके पास से 24 तख्ती, भारी मात्रा में पंफलेट्स, सीडी, साहित्या और पोस्ट कार्ड्स बरामद हुए हैं। साहित्यों में बाबरी मस्जिद से जुड़ी अहम बाते हैं। अशफाक के खिलाफ बाराबंकी में मामला दर्ज है। ये लोग सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के नाम से उत्तर प्रदेश में काम करते हैं। वसीम अहमद ने चार नवंबर 2019 को गांधी प्रेक्षागृह कैसरबाग में रिहाई मंच के लोगों के साथ बैठक की थी। बताया कि, शामली में पीएफआइ से जुड़े मोहम्मद शादाब, इसरार खान और एक वांछित है। जबकि, रॉबिन वर्मा व मोहम्मद शोएब को गिरफ्तार किया गया है।

छह माह से सक्रिय था संगठन
बीते 19 दिसंबर को लखनऊ में नागरिकता कानून के विरोध में उग्र प्रदर्शन हुए। इसे लोकल इंटेलिजेंस की असफलता के रूप में देखा जा रहा है। पीएफआइ बीते छह माह से लखनऊ समेत प्रदेश के अन्य जिलों में सक्रिय था। जुलाई और सितंबर माह में संगठन ने लखनऊ के कई इलाकों में पोस्टर चस्पा किए थे। हद तो तब हो गई, 20 दिसंबर को जब संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वसीम को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, उसके बाद भी इस नेटवर्क के बारें में पुलिस को पता नहीं चला। वसीम लखनऊ के इंदिरा नगर का रहने वाला है। अब दो अन्य की गिरफ्तारी के बाद इनके मंसूबों का खुलासा हुआ है।

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