Saturday, September 25, 2021
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ब्राजील : राष्ट्रपति बोल्सोनारो के बेटे का इजराइल से वादा- येरुशलम में जल्द खुलेगा दूतावास, नेतन्याहू बोले- शुक्रिया

येरुशलम. ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे एडुअर्डो बोल्सोनारो ने ऐलान किया है कि जल्द ही उनके पिता इजराइल के तेल अवीव में मौजूद दूतावास को येरुशलम ले जाएंगे। एडुअर्डो ने कहा कि यह कोई बहुत बड़ा फैसला नहीं है। यह एक सामान्य चीज है। एडुअर्डो ने कहा कि मेरे पिता ने इस साल चुनाव से पहले वादा किया था कि ब्राजील अपना दूतावास येरुशलम में खोलेगा। वह अब यह वादा पूरा करना चाहते हैं।

एडुअर्डो ने रविवार को इजराइल के येरुशलम में ब्राजीली व्यापार दफ्तर का उद्घाटन किया। इस दौरान इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उनके साथ ही मौजूद थे। एडुअर्डो के ऐलान पर नेतन्याहू ने कहा कि हमारे पास ब्राजील से अच्छा कोई दोस्त नहीं हो सकता। आपका शुक्रिया।

यहूदी समुदाय के समर्थक हैं बोल्सोनारो

जायर बोल्सोनारो यहूदी समुदाय के बड़े समर्थक माने जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद वे मार्च में इजराइल पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऐलान किया था कि वे येरुशलम में पहले एक व्यापार दफ्तर खोलेंगे। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरह ही वे अपने दूतावास को भी तेल अवीव से येरुशलम ले जाएंगे।

अभी सिर्फ दो देशों के दूतावास ही येरुशलम में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले साल मई में ही अपने नए दूतावास का येरुशलम में उद्घाटन किया था। उन्होंने अमेरिका के इस कदम को दोनों देशों की दोस्ती का नतीजा बताया था। उसके इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई थी। दिसंबर 2017 में संयुक्तर राष्ट्र के सदस्य देशों ने भी अमेरिका के इस फैसले के खिलाफ वोट किया था। हालांकि, इसके बावजूद अमेरिका ने साल की शुरुआत में येरुशलम में अपने दूतावास का उद्घाटन कर दिया।

अमेरिका के अलावा अभी सिर्फ ग्वाटेमाला का दूतावास ही येरुशलम में है। रूस और ऑस्ट्रेलिया पश्चिमी येरुशलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देते हैं। लेकिन दोनों के ही दूतावास तेल अवीव में हैं।

क्या है इजराइल-फिलिस्तीन के बीच विवाद?
येरुशलम इजराइल और फिलिस्तीन के बीच लंबे समय से येरुशलम को लेकर विवाद है। दरअसल, इजराइल पूरे येरुशलम को अपनी प्राचीन और अविभाज्य राजधानी मानता है। वहीं फिलिस्तीन येरुशलम के पूर्वी हिस्से पर अपना दावा करता है। इस हिस्से पर इजराइल ने 1967 की मिडिल-ईस्ट वॉर में कब्जा कर लिया था।

येरुशलम पर इजराइल की स्वायत्ता को अब तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिल पाई है। 1993 में हुए एक शांति समझौते के मुताबिक, येरुशलम की स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच शांति वार्ता होनी हैं। हालांकि, 1967 के बाद से ही इजराइल ने यहां कई निर्माण कर लिए हैं। अभी पूर्वी येरुशलम में करीब 2 लाख यहूदियों के घर हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक यह गलत है, लेकिन इजराइल इसे नहीं मानता।

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