Sunday, September 19, 2021
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जशपुर : जेल प्रशासन ने 2 साल में 30 लाख रुपए का घोटाला किया; 25 पीड़ितों को दिए जाने वाला बंदी पारिश्रमिक हड़पा

जशपुर. छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला उपजेल में अनोखे तरीके से पीड़ितों को मिलने वाले बंदी पारिश्रमिक में घपले का मामला सामने आया है। उपजेल के पूर्व उपाधीक्षक और मुख्य प्रहरी ने फर्जीवाड़ा कर पीड़ितों के 30 लाख रुपए हड़प लिए। इसके लिए आरोपियों ने रायगढ़ स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में फर्जी नाम और पते से खाते खुलवाए। इसको लेकर अभी तक 25 पीड़ित सामने आ चुके हैं। इनकी संख्या और भी बढ़ने की आशंका है। जांच में मामला पकड़े जाने के बाद इस संबंध में शनिवार को तपकरा थाने में दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई है। ऐसे में अब आरोपी उसी जेल में कैदी बनेंगे, जहां वो कभी उपाधीक्षक और मुख्य प्रहरी थे।

एक साल पहले शिकायत पर पकड़ में आया था मामला, इसके बाद शुरू हुई थी जांच

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, जेल में सजा काट रहे कैदी को मिलने वाले पारिश्रमिक के आधे रुपए पीड़ित पक्ष के परिवार को दिए जाते हैं। आरोप है कि पूर्व उपाधीक्षक उत्तम पटेल और मुख्य प्रहरी होतम सिंह मौर्य ने इसी राशि का गबन किया है। करीब एक वर्ष पहले 2018 में पहली बार इस तरह का मामला सामने आया। जिसके बाद जेल प्रशासन ने तो चुप्पी साध ली, लेकिन शिकायत मिलने पर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने जांच के आदेश दे दिए। फिलहाल आरोपी उपाधीक्षक बिलासपुर जेल और होतम सिंह निलंबित होने के मनेंद्रगढ़ उपजेल में प्रहरी है।

हत्या के दोषी की आधी पारिश्रमिक दो-तीन बार ही मिल सकी पीड़ित पिता को

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2005 में दुलदलुा क्षेत्र के सिमड़ा घटोरा में रहने वाले निरंजन ने अपनी मां की हत्या कर दी थी। निरंजन के जेल चले जाने के बाद उसके घर में उसके पिता सदई यादव और भाई निधी यादव ही बचे थे। हत्या के मामले में निरंजन यादव को उम्रकैद की सजा हुई। इसके बाद उसे अंबिकापुर जेल के लिए भेज दिया गया था। जहां निरंजन के जेल में मिलने वाले पारिश्रमिक की आधी राशि उसके पिता को मिलती थी। पीड़ित पक्ष दो-तीन बार जेल से राशि का चेक का भुगतान किया गया। इसके बाद सदई यादव ने जशपुर जेल आकर राशि नहीं मिलने की शिकायत की।

जेलर और मुख्यप्रहरी ने मिलकर बना दी फर्जी बेटी, खाता भी खुलवा दिया

इस बीच प्रदेश की अन्य जेलों से भी इस तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें आने लगीं। सदई यादव की कोई भी बेटी नहीं है। उसके दो ही बेटे हैं, निधी और निरंजन यादव। सदई यादव के शिकायत करने पर जांच शुरू हुई तो पता चला कि उपाधीक्षक उत्तम पटेल और मुख्य प्रहरी होतम िसंह ने फर्जी शपथ पत्र तैयार करते हुए निशा यादव को उसकी बेटी बना दिया था। सदई का हस्ताक्षर ना लेकर अंगूठा के निशान भी फर्जी तरीके से लगाए। फिर राशि का भुगतान करने के लिए निशा यादव के नाम ने रायगढ़ के कोटक महेंद्रा बैंक में उसका खाता खुलावा कर 21 हजार रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया।

पुलिस की फर्जी सील और साईन का किया गया उपयोग

निशा यादव काे सदई यादव की फर्जी बेटी बनाने के लिए दुलदुला थाने की फर्जी सील और थाना प्रभारी के साईन का भी उपयोग किया गया। जेल की ओर से राशि देने से पहले पीड़ित पक्ष की जानकारी और उसका प्रमाण पत्र संबंधित थाना क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। इसके मिलने के बाद ही जेल प्रशासन की ओर से राशि प्रदान की जाती है। फर्जी सील और हस्ताक्षर से पीड़ित का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। पीड़ित का प्रमाण पत्र जारी होने के बाद उसके खाते में 21 हजार रुपए भी भुगतान कर िदया गया था।

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