Friday, September 24, 2021
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कोरोना के बाद 4 महीने से कोमा में हैं प्रोफेसर; 4 साल की बेटी बोली ..

राजकोट में रहने वाले एक परिवार की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले 4 महीनों से जारी इस दर्द का कारण हैं परिवार के मुखिया राकेश वघासिया, जो कोरोना पॉजीटिव होने के बाद 4 महीनों से कोमा में हैं। परिवार में मां, पत्नी व दो बच्चों में तीन महीने का बेटा और चार साल की बेटी है।

बेटी रोज उनसे लिपटकर बात करती है, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिलता तो अपने प्यार वाले गुस्से में यह भी कह जाती है कि ‘आप अभी नहीं बोले, तो मैं आपसे कभी बात नहीं करूंगी’। ये मासूम शब्द जो भी सुनता है अपने आंसू रोक नहीं पाता।

पिता को नहीं पता था कि बेटे का जन्म हुआ है

राजकोट के कोठारिया इलाके में रहने वाले 31 वर्षीय प्रोफेसर राकेश वाघासिया अप्रैल में कोरोना पॉजीटिव हो गए थे। हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन इसके बाद से ही वे कोमा में चले गए। इस समय उनकी पत्नी नम्रता गर्भवती थीं, जिसके चलते उन्हें यह खबर नहीं दी गई थी। शादी की सालगिरह पर नम्रता पति से मिलने सीधे अस्पताल पहुंच गईं और इस तरह उन्हें पति के कोमा में होने की बात पता चली। इसी बीच उन्होंने बेटे को जन्म दिया, जो अब तीन महीने का हो चुका है, लेकिन पिता राकेश को नहीं मालूम कि बेटा उनकी गोद में खेलता रहता है।

अब तक हालत में कोई सुधार नहीं

परिवार के सदस्यों ने बताया कि यह दर्दनाक सिलसिला चार महीनों से जारी है और राकेश की हालत जस की तस है। महंगे इलाज के चलते तीन महीनों में ही परिवार की सारी जमा-पूंजी खर्च हो चुकी है। अस्पताल के वार्ड का खर्च न उठा पाने के चलते अब उन्हें घर ले जाया गया है और अब घर पर ही उनका इलाज चल रहा है। इलाज के लिए राजकोट के अलावा बेंगलुरु, चेन्नई और US तक के डॉक्टर्स से सलाह ली जा चुकी है, लेकिन राकेश की हालत में अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है।

दूसरों की मदद करने वाला परिवार आज खुद आर्थिक संकट में

राकेश राजकोट के ही एक प्राइवेट कॉलेज में प्रोफेसर हैं। लॉकडाउन के चलते उन्हें आधी तनख्वाह ही मिल रही थी। अगले महीने से उनकी यह आधी तनख्वाह भी बंद हो जाएगी। इससे परिवार के लिए घर के खर्च की भी दिक्कत आने वाली है। राकेश के पड़ोसी बताते हैं कि आर्थिक रूप से संपन्न यह परिवार सामाजिक कार्यों से लेकर मजबूरों की मदद तक के लिए हमेशा तैयार रहता था, लेकिन आज खुद ही आर्थिक संकट में है।

मां रोज कहती है बेटा खाना खाने उठ जाओ!

पत्नी और बच्चों की तरह राकेश की बूढ़ी मां का भी बुरा हाल है। वे हर समय उन्हें जगाने की कोशिश करती हैं। उनकी पसंद का खाना बनाती हैं और कहती हैं बेटा उठकर खाना खा लो। वहीं, 4 साल की बेटी खेलना-कूदना तक भूल चुकी है। वह हर समय पापा से ही लिपटी रहती है। बेटी की हालत जो भी देखता है, उसकी आंखें भर आती हैं। अब परिवार को किसी चमत्कार की आस है।

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