Tuesday, September 28, 2021
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पंजाबियों की चिंता:10 दिन से बेसमेंट में रह रहे, दुकानें 2 घंटे के लिए खुलती हैं तब मिलता है खाने-पीने का सामान

इजराइल और फिलिस्तीनी संगठन हमास के बीच संघर्ष और बढ़ता जा रहा है। यहां पिछले 10 दिन से मैं, घर से निकला नहीं हूं। घर के बेसमेंट में ही मेरी दुनिया सिमट की रह गई है। बाजार बंद हैं। जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। चारों तरफ डर का माहौल है। खबरों में रोज बताया जा रहा है कि दोनों तरफ से बमबारी हो रही है।

इजराइल की राजधानी तेल अवीव शहर स्थित कार्मेल बाजार एक सप्ताह से बंद है।
  • इजराइल और फिलिस्तीनी संगठन हमास के बीच संघर्ष में फंसे सूबे के लोग

शहर में लगातार वॉर्निंग सायरन गूंज रहे हैं। कुछ वक्त के लिए छोटी दुकानें खोली जा रही हैं, ताकि लोग जरूरी चीजों को खरीद कर गुजारा कर सकें। लड़ाई लंबी चली तो हमारा वतन लौटना मुश्किल हो जाएगा, डर का माहौल रोज गहराता जा रहा है।’ यह कहना है माहिलपुर के 43 वर्षीय विक्की कौशल का जो तेल अवीव में 13 साल से रह रहे हैं। वे वहां पर केयर टेकर हैं।

विक्की 2008 में पंजाब से केरल की एक प्राइवेट एजेंसी के जरिए तेल अवीव (इजराइल की राजधानी) आए थे। वे यहां पर बुजुर्गों की देखभाल व डोमेस्टिक हेल्पर के तौर पर काम करते हैं। उनके साथ ऊना के राकेश सिंह (44), नकोदर के अवतार सिंह (42) एवं कपूरथला के गुरप्रीत सिंह (35) भी 2008 में इसी एजेंसी के जरिए तेलअवीव आए थे। ( जैसा भास्कर संवाददाता परमजीत सिंह को बताया)

हालात बिगड़ रहे हैं, परिवार गांव में, चिंता सता रही

विक्की कहते हैं, ‘मेरा पूरा परिवार माहिल पुर में रहता है। मां सीता देवी, पिता श्रवण कुमार और पत्नी बीनू गांव में ही हैं। बेटा 21 साल का है और बेटी 16 साल की है। यहां पर तेल अवीव मेंं हालात हर रोज बिगड़ रहे हैं। गत शनिवार को हमास की ओर से हमला हुआ था। कई लोगों की मौत और घायल होने की खबर मिली।

शुक्र है मैं, जिस घर में काम करता हूं वह शहर के बीचों बीच में है, हालांकि डर भी लग रहा है, क्योंकि यदि लड़ाई लंबी चली तो घर लौटना मुश्किल हो जाएगा। वैसे भी यहां हर दो साल बाद ही छुट्टी मिलती थी। पिछली बार मैं, 19 अक्टूबर 2019 में गांव आया था। दिसंबर (2019 में ही) मैं वापस तेल अवीव लौट आया था।’

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से लड़ाई रोकने की अपील

तेल अवीव में ही रहने वाले कपूरथला के गुरप्रीत सिंह, ऊना के राकेश सिंह, और नकोदर के अवतार सिंह ने कहा, ‘वे रोजी रोटी की खातिर इस देश में आए हैं परंतु यहां के ताजा हालात अच्छे नहीं हैं। वे तीनों डरे हुए हैं। उनके इलाके में पंजाबियों की संख्या ठीक-ठाक है। लड़ाई यदि लंबी खिंची तो उनका यहां रहना मुश्किल हो जाएगा। हम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं व अदालतों से अपील करते हैं कि वे इस युद्ध को तुरंत बंद कराएं ताकि बाहरी देश के लोग अपने वतन लौट सकें।’

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