Saturday, September 18, 2021
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राजस्थान : विधानसभा में 9 माह की मासूम काे लाए पुष्कर विधायक रावत, बाेले- घर में थी बच्ची, फिर भी सीज कर दिया

जयपुर. विधानसभा में शुक्रवार को पुलिस-प्रशासन की संवेदनहीन कार्यप्रणाली और निजी फाइनेंस कंपनियाें की क्रूरता का चाैंकाने वाला वाक्‌या देखने काे मिला। पुष्कर विधायक सुरेश रावत अपनी गाेद में 9 माह की बच्ची को लेकर विधानसभा में पहुंचे। पहले गलियारे, फिर सदन में मामला उठाते हुए बोले- अजमेर के रूपनगढ़ में नाै माह की बच्ची घर में साे रही थी और फाइनेंस कंपनी के लाेगाें ने मकान काे सीज कर दिया। बच्ची की मां-दादा सहित अन्य परिजन चीखते-चिल्लाते रहे कि बच्ची काे ताे बाहर निकाला जाए, ताला खाेला जाए, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। परिजन पुलिस व एसडीओ के पास पहुंचे ताे वहां भी सुनवाई नहीं हुई। आखिर, अजमेर कलेक्टर विश्वमाेहन शर्मा के पास गुहार लगाई। तब कहीं जाकर ताले खुलवाए और बच्ची को निकाला। बच्ची करीब 8 घंटे तक घर में और परिजन बाहर तड़पते रहे। यह संभवत: पहला मौका है, जब कोई विधायक इतनी कम उम्र के बच्चे को लेकर विधानसभा में पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।

यह है मामला : बच्ची के दादा ओमप्रकाश के मुताबिक कोर्ट से स्टे के बावजूद फाइनेंस कंपनी ने मकान सीज किया। सबकाे बाहर पटक दिया। 9.5 लाख का कर्ज है, अब तक 4.5 लाख रु. चुकाए हैं।

सरकार: यूडीएच मंत्री धारीवाल बोले- फाइनेंस कंपनी पर रोंगफुल कन्फाइनमेंट की कार्रवाई
जाेशी ने सरकार से जवाब देने काे कहा। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल बाेले- एसके फिनकॉर्प फाइनेंस कंपनी के खिलाफ धारा 342 में रोंगफुल कन्फाइनमेंट (गलत कारावास) की कार्रवाई की गई है। पुलिस जांच में बच्ची तीन-चार घंटे बंद होना पाया गया। (विधायक रावत ने विराेध किया, बोले- अफसरों ने गलत तथ्य दिए। बच्ची सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक बंद रही।)

विपक्ष : राठाैड़ बाेले-मामला रोंगफुल कन्फाइनमेंट का नहीं, बच्ची में पाेती का चेहरा देखें मंत्री
भाजपा विधायक राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि यह घटना रोंगफुल कन्फाइनमेंट की नहीं है। कोई भी मां नौ महीने की बच्चों से आधे घंटे भी अलग नहीं रह सकती। मंत्रीजी उस बच्ची के चेहरे पर अपनी पोती का चेहरा लगा कर देखो, फिर फैसला करो।

स्पीकर जाेशी बाेले- अफसरों पर सख्त कार्रवाई हो
स्पीकर सीपी जोशी ने कहा कि कमरे में बच्ची है तथा पुलिस की मौजूदगी में ताला लगा है तो गंभीर मामला है। इससे भी गंभीर यह है कि एसडीएम के नोटिस में लाने के बाद भी कलेक्टर के पास जाना पड़ा। मंत्री अफसरों पर सख्त कार्रवाई करें।

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