Wednesday, September 22, 2021
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गुजरात के जंगलों से राहत की खबर:एक भी शेर की न तो मौत हुई, न ही लापता हुए; तूफान की तबाही के बीच गिर एशियाई शेर सुरक्षित

ताऊ ते तूफान का सर्वाधिक असर गिर-सोमनाथ, जूनागढ़, अमरेली और भावनगर जिलों में है। पिछले दो दिनों से इन जिलों में हुई तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। तबाही के बीच राहत की बात ये है कि यहां रहने वाले एशियाई शेर सुरक्षित हैं। वन विभाग का दावा है कि ताऊ ते तूफान से शेरों को कुछ नुकसान नहीं हुआ है।

तूफान की चेतावनी मिलते ही वन विभाग सतर्क हो गया था और शेरों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कार्यवाही में जुट गया था।

राजुला के समुद्रतट पर रहने वाले शेर भी सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। गिर-सोमनाथ जिले की छह तहसीलों में 100 से 150 किमी की स्पीड से हवाएं चलीं, जिससे ऊना, गिरगढ़ा और कोडिनार पंथ के गांवों को भारी नुकसान पहुंचा। कई कच्चे मकानों के धराशायी होने के साथ-साथ आम और नारियल की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सूत्रापाडा में कई जगह आम के बगीचे नष्ट हो गए हैं।

गिर के जंगल में 600 से अधिक शेर हैं

एशियाई शेरों का एकमात्र निवास गिर जंगल जूनागढ़, गिर-सोमनाथ, अमरेली, भावनगर जिले तक फैला हुआ है। पिछली गणना के अनुसार गिर जंगल में कुल 600 शेर हैं। शेर-शेरनी और शावक अलग-अलग ग्रुप बनाकर जंगलों में रहते हैं। कुछ शेरों का ग्रुप गिर-सोमनज्ञथ, अमरेली जिले में समुद्र के किनारे रहता है।

मुख्य वन संरक्षक डीटी वसावड़ा ने बताया कि जूनागढ़ के मांगरोल से लेकर सोमनाथ, कोडीनार, अमरेली के जाफराबाद, राजुला, पीपावाव, भावनगर के महुआ तक शेरों की आबादी फैली हुई है। तूफान की चेतावनी मिलते ही वन विभाग सतर्क हो गया था और शेरों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कार्यवाही में जुट गया था।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राजुला में समुद्र के किनारे रहने वाले शेर खुद ही सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। ताऊ ते तूफान से राजुला, जाफराबाद, उना, कोडिनार, सोमनाथ या महुआ में एक भी शेर के मरने या लापता होने की जानकारी नहीं है। गिर जंगल में रहने वाले सभी शेर सुरक्षित हैं।

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