Friday, September 24, 2021
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रेमडेसिविर दे रहा है शुगर की बीमारी : कोरोना से रिकवर हुए 2000 से अधिक मरीजों का शुगर लेवल 300 से 400 तक बढ़ गया

जिस रेमडेसिविर इंजेक्शन को कोरोना का रामबाण इलाज माना जा रहा हैं, वही लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। रेमेडेसिविर की डोज लेने के बाद मरीजों को ऐसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका जीवनभर इलाज कराना पड़ सकता है। रेमडेसिविर और स्टेरॉयड के कॉम्बिनेशन से शरीर का शुगर लेवल बढ़ जाता है। डायबिटीज के मरीजों का शुगर 400 तक पहुंच जाता है। कोरोना ठीक होने के बाद बॉडी हार्मोन में बदलाव होने लगता है और मरीज को कई समस्या पैदा हो जाती है।

रेमेडिसिविर के साइड इफेक्ट के कारण मरीज डॉक्टरों के चक्कर काट रहे हैं। फिर भी डॉक्टर कोरोना मरीजों को रेमेडेसिविर इंजेक्शन लिख रहे हैं और लोग इसे ब्लैक में खरीदने पर मजबूर हैं। डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना से रिकवरी के बाद मरीजों को पोस्ट कोविड कॉम्पिलिकेशन्स की समस्या होती है।

शहर में 2000 मरीजों में रेमडेसिविर के साइड इफेक्ट सामने आए हैं। ये वे मरीज हैं, जो 14 दिन से अधिक समय में रिकवर हुए और ऑक्सीजन बाइपेप और वेंटिलेटर पर रहे। इन मरीजों को थकान, घबराहट, सांस लेने की समस्या, जोड़ो में दर्द, अनिद्रा, एंजायटी, कमजोरी, भूंख न लगना, मांसपेशियों में खिंचाव, जैसी समस्या हो रही हैं।

ये नियमित जांच कराएं

सीबीसी, लिपिड प्रोपाइल

ब्लड प्रेशर, शुगर, ऑक्सीजन लेवल की जांच

ईसीजी, सीने का एक्स-रे, कुछ मामलों में सोनोग्राफी और एचआरसीटी।

कितने प्रतिशत मरीजों को क्या समस्या

55 से 60 फीसदी मरीजों का शुगर बढ़ गया है, किडनी लिवर में साइड इफेक्ट आए हंै।

25 से 30 फीसदी मरीजों को एंजायटी है, डिप्रेशन है।

60 फीसदी मरीजों में लंग्स फाइब्रोसिस, घबराहट और सिर दर्द है, यूरिन समस्या।

40 फीसदी मरीजों में गले में खराश और दर्द, सीने में दर्द और सूखी खांसी ।

20 फीसदी मरीजों में कमजोरी, थकान है।

नोट: 

(यह जानकारी डॉक्टरों से बातचीत में सामने आई है। यह समस्याएं उन मरीजों को हुई, जो अस्पताल में ऑक्सीजन बाइपेप और वेंटिलेटर पर रहे)

रेमडेसिविर और स्टेरॉयड का कॉम्बिनेशन देता है समस्या

जिन मरीजों को कोरोना के इलाज के दौरान रेमडेसिविर या स्टेरॉयड दिया जाता है, उन्हें मुख्य रूप से शुगर और हार्मोनल डिसऑर्डर की समस्या होती है। डॉक्टरों के मुताबिक पिछले दिनों करीब 2000 ऐसे मरीज सामने आएं हैं, जिनका शुगर लेवल बढ़ गया।

कोरोना से पहले उनका शुगर लेवल सामान्य था, लेकिन रेमडेसिविर लगाने के बाद 300 से 400 तक पहुंच गया। डॉक्टरों का मानना है कि रेमडेसिविर वे स्टेरॉयड के कॉम्बिनेशन से शरीर में शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। इससे हाईपर ग्लाईसेमिया हो जाता है।

पोस्ट कोविड मरीजों का हो नियमित बॉडी चेकअप

रेमेडसिविर के साइड इफेक्ट के लक्षणों के कारण मरीजों को लगता है कि वह कहीं दोबारा कोरोना पॉजिटिव तो नहीं हो गया। मरीजों को डॉक्टरों की सलाह है कि कोरोना होने के बाद नियमित बॉडी चेकअप और जांच करानी चाहिए। महीने में एक या दो बार बॉडी चेकअप जरूरी है। ताकि सही समय पर समस्या का पता लगा कर उसका इलाज शुरू किया जा सके। कोरोना रिकवर मरीजों में ऐसी समस्याएं 2 से 6 माह तक होती है।

दूसरी लहर में रेमेडेसिविर की डिमांड ज्यादा आ रही

रेमडेसिविर के साइड इफेक्ट पता होने के बाद भी कोरोना मरीजों को यह दिया जाता है। पहली लहर की अपेक्षा दूसरी लहर में इसकी डिमांड ज्यादा है। एक मार्च 2021 से अब तक सूरत में रेमडेसिविर की करीब 45 हजार से अधिक डोज (एक डोज़ 100 मिलीग्राम) दी जा चुकी है। शहर में रोजाना करीब 7 हजार डोज की मांग है, जबकि सप्लाई करीब 5 हजार डोज की है। सप्लाई कम होने के कारण मरीजों के परिजनों को लाइन में लगना पड़ रहा है।

रेमडेसिविर एंटीवायरल दवा है, कोरोना की नहीं। कोविड मरीजों को रेमडेसिविर के साथ स्टेरॉयड दिया जाता है। इसलिए शुगर लेवल बढ़ता है। इससे किडनी और लिवर पर भी साइड इफेक्ट होता है, जिससे हेपेटाइटिस, यूरिन की समस्या, भूख न लगना आदि समस्या आती है। डिप्रेशन व एंजायटी की शिकायत भी होती है। – डॉ. नैमिश शाह, मेडिसिन विभाग, स्मीमेर अस्पताल

रेमडेसिविर से लिवर पर ज्यादा असर पड़ता है, इसलिए मरीज की समय-समय पर जांच करवाते हैं। आम आदमी का शुगर खाली पेट 110 और खाना खाने के एक घण्टे बाद 140 तक होता है। रेमडेसिविर और स्टेरॉयड के बाद शुगर लेवल बढ़ जाता है। डायबिटीज वाले मरीजों का सूगर लेबल 400 तक भी हो जाता। – डॉ. विवेक गर्ग, मेडिसिन विभाग, सिविल अस्पताल

रेमडेसिविर सभी मरीजों को देने की जरूरत नही है। इसका प्रभाव किडनी लिवर पर होता है। माइल्ड लक्षण वाले मरीजों को नहीं देना चाहिए। स्टेरॉयड देने से सूगर लेवल बढ़ जाता है, यह लम्बे समय तक रहता है। जिनकी लिवर किडनी की बीमारी है, उन्हें रेमडेसिविर नही दिया जा सकता। – डॉ. पारुल बडगामा, एचओडी टीबी चेस्ट विभाग

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