Friday, September 17, 2021
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मेरठ मंडल के सभी डीएम से मांगी रिपोर्ट

चारागाह की जमीन को लेकर फिर से जांच शुरू करा दी गई है। पंचायत चुनाव के बाद अब जब गांव में प्रधान बदले हैं। तो ऐसे समय में मेरठ मंडल के सभी 6 जिलों की तहसीलों से चारागाह की जमीन को लेकर जांच कराई जा रही है। की किन किन गांवों में चारागाह की सरकारी जमीन पर कब्जा है, और मौजूद समय में यह किस स्थिति में है।मेरठ मेरठ मंडल के कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने मंडल के सभी 6 जिलों मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुधनगर, बागपत और हापुड़ जिलों के जिलाधिकारियों से चारागाह की जमीन को लेकर मौजूद समय की रिपोर्ट मांगी है। जिसमें कहा गया है कि संबंधित तहसीलदार और एसडीएम चारागाह की जमीन को लेकर रिपोर्ट तैयार करें। यदि जिन गांव में चारागाह की जमीन पर कब्जा है। या किसी भी गांव के व्यक्ति, पूर्व प्रधान या मौजूद प्रधान ने अवैध तरह से फसल बोई है तो ऐसे लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाए।

जमीन पर होने लगा कब्जा

मेरठ मंडल के 6 जिलों में 2191 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें सबसे अधिक बुलंदशहर में 946 ग्राम पंचायत हैं। चारागाह की जमीन को लेकर तहसील स्तर पर अलग से जांच कराई जा रही है। जिससे पता चल सके कि जितनी भी चारागाह की गांव में जमीन है। वह सभी कब्जा मुक्त रहे और ऐसी जमीन पर किसी भी व्यक्ति का कब्जा न मिले।

मेरठ मंडल के कई जिलों में सरकारी जमीन पर कब्जा होने लगा है।
मेरठ मंडल के कई जिलों में सरकारी जमीन पर कब्जा होने लगा है।

यह है मौजूद हालत

जानी ब्लॉक के ढिंडाला गांव में चारागाह की तीन स्थान पर एक हेक्टेयर जमीन है। गांव निवासी अर्जुन डिंडाला ने बताया कि पूर्व में चारागाह की जमीन पर कब्जा था। लेकिन प्रदेश में जब योगी सरकार आई तो चारागाह की जमीन से कब्जा हटवाया गया। और इस समय तीनों स्थानों पर जमीन खाली पड़ी हुई है।

रजपुरा ब्लॉक के खरदोनी गांव में चारागाह की जमीन पर ईंख बोई हुई है। गांव निवासी बाबर चौहान का कहना है कि चारागाह की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर ईंख बो रखी है। जबकि यह सरकारी जमीन है। और यह खाली कराई जानी चाहिए।

22 नवंबर 2020 को नप चुके हैं SDM

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चारागाह की जमीन निजी बिल्डर को सौंपने वाले SDM के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लिया था। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोपी और मेरठ जिले की सरधना तहसील में SDM रहे भूपेंद्र सिंह को उपजिलाधिकारी के पद से डिमोट कर तहसीलदार का आदेश दिया था। साल 2013 में मेरठ की सरधना तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव सिवाया, जमाउल्लापुर के राजस्व अभिलेखों में चारागाह के तौर पर दर्ज 1.583 हेक्टेयर भूमि को निजी बिल्डर को आवंटित कर दी गई थी। इसकी शिकायत के बाद जांच हुई। जिसमें SDM दोषी पाए गए। 22 नवंबर 2020 को मुख्यमंत्री ने कड़ी कार्रवाई की थी।

सख्त हुए कमिश्नर, मांगी रिपोर्ट

मेरठ मंडल के कमिश्नर सुरेंद्र सिंह का कहना है कि चारागाह की जमीन कब्जा मुक्त कराई गई हैं। यदि मेरठ मंडल के किसी भी जिले में चारागाह की जमीन पर किसी भी व्यक्ति का अवैध कब्जा मिलता है तो ऐसे लोगों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से जांच रिपोर्ट मांगी गई है।

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