भारत में सड़क हादसों में मारे जाने वाले लोगों की संख्‍या में विश्‍व में नंबर एक पर आता है। ये अपने आप में काफी दुखद है। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में से अकेले 11 फीसद मौत केवल भारत में ही होती है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2019 की रिपोर्ट इस संबंध में बेहद खास है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस दौरान 449,002 सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 151,113 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि वर्ष 2018 में हुई सड़क दुर्घटनाओं के मुकाबले वर्ष 2019 में सड़क हादसों में कम लोगों की जान गई। इसके बाद भी इसको सही नहीं कहा जा सकता है।

ये हैं हादसों की वजह

भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की वजह की यदि बात करें तो वो कई सारी हैं। कहीं पर सड़कें खराब हैं। कहीं पर गड्ढे अधिक हैं। सड़क पर चलने वालों का नियमों को तोड़ना, तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना, ड्राइविंग के समय फोन पर बात करना, शराब के नशे में ड्राइविंग करना, ड्राइविंग के दौरान नींद की झपकी आना समेत कई दूसरे कारण भी हैं। इस बीच मौसम में आने वाला बदलाव भी इसकी एक बड़ी वजह है। उत्‍तर भारत की ही यदि बात करें तो सर्दियों में यहां पर होने वाले सड़क हादसों की संख्‍या अचानक कई बार बढ़ जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह होती है कोहरा।

केंद्र सरकार के सड़क मंत्रालय की रिपोर्ट

अकसर हाईवे पर घना कोहरा होने की वजह से ड्राइवर को नजर नहीं आता है और वो हादसे का शिकार हो जाता है। यूपी के यमुना एक्‍सप्रेस वे पर सर्दी के दिनों में छाए कोहरे में एक साथ कई गाडि़यों का आपस में ठुक जाती है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट बताती है कि कोहरे और धुंध की वजह से वर्ष 2018 में जहां 28026 सड़क हादसे हुए थे वहीं 2019 में ये बढ़कर 33602 हो गए थे। इनमें करीब 19 फीसद की तेजी देखने को मिली थी। इस दौरान हुई मौतें भी 11841 से बढ़कर 13405 हो गई थी। इसमें करीब 12 फीसद का इजाफा देखने को मिला था। इस दौरान सड़क हादसों में घायल होने वालों की संख्‍या में लगभग 22 फीसद का इजाफा देखने को मिला था।

जरूरी उपाय और एहतियात

केंद्र सरकार की इस रिपोर्ट में सड़क हादसों के कई पहलुओं और उनके कारणों का जिक्र किया गया है। जहां तक सर्द मौसम में छाने वाले कोहरे और धुंध की बात है तो इससे बचने के लिए जानकार जो टिप्‍स देते हैं यदि उनको फॉलो किया जाए तो इस तरह के हादसों से जरूर बचा जा सकता है।

  • कोहरे के समय में दोपहिया वाहन चलाने वालों के कपड़ों का रंग भी काफी मायने रखता है। आपको बता दें कि कुछ रंग बेहद कम दृष्‍यता में भी दिखाई दे जाते हैं जबकि कुछ रंगों का पास आने पर भी पता नहीं चल पाता है। जानकार ब्राइट ग्रीन कलर को ऐसे समय में सबसे बेहतर मानते हैं।
  • कोहरे या धुंध में गाड़ी चलाते समय हमें न सिर्फ खुद को बचाना है बल्कि दूसरों को भी सुरक्षित रखना है। ऐसे में गाड़ी को भी भी हाईबीम पर न चलाएं। ऐसे में कई बार सड़क के बीच में बने डिवाडर न होने की वजह से सामने से आ रहे वाहन को कुछ नजर नहीं आता है और वो हादसे का शिकार हो सकता हे। गाड़ी चलाते समय हमेशा लो-बीम ही रखी जानी चाहिए।
  • कोहरे के समय में बेहतर होगा कि आप अपनी गाड़ी के सभी इंडीकेटर जलाकर चलें। इन इंडीकेटर्स को इनके रंगों की वजह से दूर से देखा जा सकता है।
  • ऐसे समय में फॉगलैंप का इस्‍तेमाल करने की सलाह बार-बार दी जाती है।
  • कोहरे में गाड़ी की स्‍पीड को ध्‍यान में रखने के अलावा ये भी जरूरी है कि अपनी लाइन को बेवजह न बदलें। ऐसे में हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
  • बेहद कम विजिबिलिटी के समय स्‍पीड पर नियंत्रण के अलावा सड़क पर बनी ही सफेद और पीली पट्टी का भी ध्‍यान रखें। ये ऐसे समय में आपके बेहतर गाइड की भूमिका निभा सकती है।
  • कोहरे के समय में अकसर गाडि़यों का शीशा बंद करके ड्राइव करने की वजह से शीशे पर धुंध जमा हो जाती है जिसकी वजह से सामने का नजारा बेहद कम दिखाई देता है। ऐसे में हल्‍का एसी खोल लेने से शीशे पर लगी ये धुंध साफ हो जाती है।
  • ऐसे कम विजिबिलिटी वाले सयम में गाड़ी में म्‍यूजिक बजाने से बचना चाहिए। इसकी वजह एक ये भी है कि इनकी वजह से आप बाहर की आवाज को सुन नहीं पाएंगे। अच्‍छा ये भी होगा कि दोनों तरफ की खिड़कियों के शीशे कुछ नीचे कर ड्राइव करें। ध्‍यान रहे एक तरफ का ही शीशा नीचे कर ड्राइव करने से गाड़ी के असंतुलित होने का खतरा रहता है।
  • ऐसे समय में गाडि़यों पर लगी रेडियम टेप भी काफी कारगर होती है।
  • सड़क पर बीच में गाड़ी खराब हो जाने पर उसके इंडीकेटर जले ही रहने दें और इशारा कर अपने पीछे आ रही गाडि़यों को सावधान करें। गाड़ी को जल्‍द से जल्‍द साइड लगाने की कोशिश करें।