Tuesday, September 28, 2021
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हिमाचल प्रदेश पहुंचे सईद सबतुला ने बताई आंखों-देखी

अफगानिस्तान से भागकर आया एक अफगानी छात्र हिमाचल प्रदेश पहुंचा है। छात्र का नाम सईद सबतुला है। वह सोलन जिले की डॉ. यशवंत सिंह परमार (नौनी) यूनिवर्सिटी में पढ़ता है। उसने बताया कि वह अफगानिस्तान से दिल्ली आई लास्ट फ्लाइट में किसी तरह भारत पहुंचा। अफगानिस्तान में इस समय हालात बेहद खतरनाक है। लोग जान बचाने के लिए दूसरे देशों में भाग रहे हैं। सईद ने बताया कि पूरे देश पर तालिबान का कब्जा हो चुका है। अब सभी को यह चिंता सता रही है कि भविष्य में क्या होगा। क्योंकि तालिबान लोगों पर पाबंदियां लगा कर रखता है। सईद के परिवार में 9 सदस्य हैं और उसे यह नहीं पता कि अब उनका क्या होगा। वह तालिबान छुट्टियां बिताने गया था, लेकिन अभी छुट्टियां 10 दिन और बची थीं। इससे पहले ही वो किसी तरह भारत आ गया।

सेना के जवान नौकरियां छोड़कर घरों में बैठ गए हैं

सईद सबतुला ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भी तालिबानी लड़ाके जगह-जगह मौजूद हैं। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इक्का-दुक्का वाहन ही बाहर दिखाई दे रहे हैं। उनकी भी तालिबानी लड़ाके कड़ी चेकिंग कर रहे हैं। इसके अलावा सेना के जवान नौकरियां छोड़कर घरों में बैठ गए हैं। सभी तरह के हथियार तालिबान के हवाले कर दिए गए हैं। वह खुद काबुल में रहते हैं, जहां माहौल अभी शांत है, लेकिन आसपास के इलाकों से गोलियां चलने की वारदातें सुनने को मिल रही है।

सईद का कहना है कि वह 15 अगस्त को सुबह 11:00 बजे अफगानिस्तान से दिल्ली आने वाली फ्लाइट में आए। उनके साथ ब्राजील की भी एक फ्लाइट निकली थी। इसके 1 घंटे बाद तालिबानी लड़ाकों ने पूरे एयरपोर्ट पर कब्जा कर लिया। अगर वह थोड़ी देर और कर देते तो वहीं पर फंसे रह जाते। दिल्ली आने वाली इस आखिरी फ्लाइट में नेपाल के भी कुछ लोग थे, जबकि अफगानिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल हदी अर्घंदेवाल भी दिल्ली आए हैं। उन्होंने 2 महीने पहले इस्तीफा दिया था। स्थानीय लोग जान बचाने के लिए दूसरे देशों में भाग रहे हैं।

देश से निकलने के लिए एयरपोर्ट के किनारे डटे हैं लोग

सईद ने बताया कि सभी लोग जो वहां से निकलना चाहते हैं, एयरपोर्ट के किनारे डटे हुए हैं। जैसे ही फ्लाइट शुरू होंगी, लोग यहां से निकलना शुरू हो जाएंगे। हालात इस वजह से खराब हैं, क्योंकि जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, कर्फ्यू जैसा माहौल है। लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। सभी दुकानें बंद हैं। घरों में राशन पानी की कमी होना शुरू हो चुकी है। अकेली लड़की के घर से बाहर निकलने पर पूरी तरह से पाबंदी है। एक मर्द या तीन से चार लड़कियां साथ में होनी चाहिए, तभी वह घर से बाहर निकल सकती हैं।

सईद का कहना है कि हालांकि तालिबान कह रहा है, उनकी जनता के साथ कोई लड़ाई नहीं है। जो लड़ाई सरकार के साथ है और वह भी खत्म हो चुकी है। बच्चों और लड़कियों को स्कूल जाने दिया जाएगा, लेकिन हिजाब पहनना जरूरी होगा। बुर्के के लिए भी वह मना कर रहे हैं। तालिबान का कहना है कि वह बेहतर तरीके से यहां पर सरकार चलाएंगे। लोगों को परेशानी न हो और विदेशों के साथ भी तालमेल के साथ काम करेंगे। लेकिन जिस तरह से 1995 से 2000 तक तालिबान का इतिहास रहा है। वह डराने वाला है।

सईद के परिवार में 4 भाई और 3 बहनें

आने वाले 10 से 15 दिनों में ही यह साफ हो पाएगा कि अफगानिस्तान के लोगों का क्या होगा। उनके परिवार में 9 सदस्य हैं, उनके माता-पिता उनको मिलाकर 4 भाई और 3 बहनें हैं। अभी हाल ही में उनकी सगाई भी हुई है और अगले साल शादी भी है। उनकी होने वाली पत्नी भी काबुल में रहती है। सभी को यही चिंता सता रही है कि कब शांति होगी और कब लोग घरों से बाहर चैन से निकल सकेंगे।

सेना का पीछे हटना हैरान करने वाला

अफगानिस्तान से आए सईद का कहना है कि यहां के लोगों को सेना का इस तरह से पीछे हट जाना हैरान कर रहा है। क्योंकि जिस तरह से अफगानी सैनिकों के पास आधुनिक हथियार थे और अमेरिका ने उन्हें प्रशिक्षण दिया था। ऐसे में महज बिना लड़े ही पीछे हट जाना लोगों को समझ नहीं आ रहा है। अफगानी सैनिकों ने अपने सभी हथियार बिना किसी लड़ाई और जद्दोजहद के तालिबानी लड़ाकों को सौंप दिए हैं। सेना के जवान अपनी नौकरियां छोड़कर घरों में बैठ गए हैं। नेता यहां से भाग चुके हैं।

तालिबानी लड़ाकों ने दिया भरोसा- डरने की जरूरत नहीं

अफगानिस्तान में फंसे नवीन ठाकुर की उनकी मां पदमा देवी से दोबारा फोन पर बात हुई है। उन्होंने बताया कि तालिबान के लोग भारतीय दूतावास में आए थे। वहां ठहरे लोगों को तालिबानी लड़ाकों ने भरोसा दिलाया है कि डरने की कोई जरूरत नहीं है। 5 से 10 दिनों के भीतर दूतावास में ठहरे सभी लोगों को सुरक्षित वापस भेज दिया जाएगा। उनकी माता का कहना है कि तालिबान ने भले ही सुरक्षा का भरोसा दिया है, लेकिन विश्वास नहीं किया जा सकता। नवीन के साथ देहरादून के भी कुछ लोग वहां पर फंसे हुए हैं।

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