Monday, September 27, 2021
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SC ने पकड़ी MP पुलिस की कारस्तानी

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस की बड़ी कारस्तानी उजागर की है। सागर जिले की पुलिस ने हत्या के मामले में आरोपी को तो गवाह बना दिया। जबकि शिकायत करने वाले को आरोपी। कोर्ट को जब इसका पता चला तो उन्होंने उम्रकैद की सजा पाए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। मगर निचली अदालत और हाईकोर्ट ने अपने दायित्व का निर्वाह सही से नहीं किया है। लेकिन किसी तकनीकी आधार पर हम अन्याय के खिलाफ आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकते।

यह था पूरा मामला : सागर के मोती नगर थाना क्षेत्र की पुलिस ने 13 मई 2008 को सहोदरा बाई की शिकायत पर रूईया व कैलाश के खिलाफ उसके देवर पप्पू की हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए 16 मई 2008 को सहोदरा बाई, उसके पति व भाई को ही आरोपी मानकर गिरफ्तार कर लिया। फिर बताया कि रूईया द्वारा 250 रुपए न लौटाने से नाराज होकर उक्त तीनों ने ही पप्पू की हत्या की। फिर रुईया पर आरोप लगा दिए। इतना ही नहीं पुलिस ने इस मामले में रूईया और अन्य ‘आरोपियों’ को गवाह बना दिया। निचली अदालत तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुना दी। फिर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी सजा बरकरार रखी। इस फैसले के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

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