Sunday, September 19, 2021
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Sebi ने आसान किए IPO से जुड़े कुछ नियम, इन लोगों को होगी आसानी

पूंजी बाजार नियामक Sebi ने IPO के बाद प्रर्वतकों के लिये न्यूनतम ‘लॉक इन’ अवधि कम करने का फैसला किया। Sebi ने कहा कि समूह की कंपनियों के लिये खुलासा नियमों को दुरुस्त करने का फैसला किया गया है।

पूंजी बाजार नियामक Sebi ने IPO के बाद प्रर्वतकों के लिये न्यूनतम ‘लॉक इन’ अवधि कम करने का फैसला किया। Sebi ने कहा कि समूह की कंपनियों के लिये खुलासा नियमों को दुरुस्त करने का फैसला किया गया है।

Sebi ने ‘लॉक इन’ अवधि के बारे में कहा कि अगर Offer के उद्देश्य में किसी परियोजना के लिए पूंजीगत व्यय के अलावा अन्य बिक्री पेशकश या वित्तपोषण का प्रस्ताव शामिल है, तो आरंभिक सार्वजनिक निर्गम और अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (NFO) में आवंटन की तारीख से प्रवर्तकों का न्यूनतम 20 प्रतिशत का योगदान 18 महीने के लिये ‘लॉक’ किया जाना चाहिए। वर्तमान में, ‘लॉक-इन’ अवधि 3 साल है।

सेबी ने कंपनियों के अधिग्रहणकर्ताओं और प्रवर्तकों के लिए कुछ खुलासा जरूरतों को भी हटा दिया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Sebi) ने प्रणाली चालित खुलासा (एसडीडी) के अमल में आने पर अधिग्रहण नियमों में संशोधन किया है।

नए नियम के तहत, अधिग्रहण करने वालों/प्रवर्तकों के लिए शेयरों के अधिग्रहण या निपटान पर कुल 5 प्रतिशत और उसके बाद 2 प्रतिशत का कोई भी बदलाव, वार्षिक शेयरधारिता घोषणाएं और अधिग्रहण नियमों के तहत डिपॉजिटरी सिस्टम में पंजीकृत ऋणभार का सृजन या आह्नान या उसे जारी करना लागू नहीं होगा।

नियामक ने 13 अगस्त की एक अधिसूचना में कहा कि संशोधन एक अप्रैल, 2022 से प्रभावी होगा। सेबी के बोर्ड द्वारा इस महीने की शुरुआत में इस संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है।

सेबी ने अपनी बोर्ड बैठक में कहा जिन खुलासा जरूरतों की बात की जा रही है उनके लिये एसडीडी पहले से ही है। एसडीडी व्यवस्था के साथ ही इस प्रकार के खुलासों को दस्तावेजी रूप में सौंपे जाने के साथ अधिग्रहण नियमन के तहत चल रही है

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