Sunday, September 26, 2021
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दक्षिण कोरिया : छोटे बाल रखने पर पुरुषों के निशाने पर आई तीरंदाज, हजारों महिलाओं ने समर्थन में बाल कटवाए

दक्षिण कोरिया की तीरंदाज एन सैन ने टोक्यो ओलिंपिक में 3 गोल्ड मेडल जीतकर दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी, लेकिन अपने ही देश में बधाई के साथ उन्हें छोटे बाल रखने के कारण तीखी आलोचना भी झेलनी पड़ी। पहली बार ओलिंपिक में भाग लेकर इतिहास रचने वाली सैन के मेडल से ज्यादा चर्चा उनके छोटे बालों की हो रही है। द. कोरिया में इस हेयरस्टाइल को पुरुषों से नफरत के तौर पर देखा जाता है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने 20 साल की सैन के हेयरस्टाइल को ‘फेमिनिस्ट’ करार दे दिया। लोगों ने यहां तक लिखा कि ‘हमने अपने टैक्स के पैसों से इसलिए ट्रेनिंग और सुविधाएं नहीं दी थी कि आप फेमिनिस्ट हरकत करें।’ एक यूजर ने लिखा, ‘अच्छी बात है कि गोल्ड मेडल जीता लेकिन छोटे बालों में वो फेमिनिस्ट लगती हैं। अगर वह फेमिनिस्ट हैं, तो मैं समर्थन वापस ले रहा हूं।’ पर जैसे ही आलोचना बढ़ने लगी तो हजारों कोरियाई महिलाएं सैन के समर्थन में आ गईं।

‘हैशटेग वुमनशॉर्टकट’ कैंपेन

‘हैशटेग वुमनशॉर्टकट’ कैंपेन के जरिए उन्होंने छोटे बालों के साथ अपनी तस्वीरें शेयर करनी शुरू कर दीं। इस कैंपेन की सूत्रधार हॉन जियांग हैं। वे कहती हैं कि विरोध करने वाले ज्यादातर युवा पुरुष हैं, कई बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं। सैन और अन्य महिलाओं के खिलाफ नफरतभरी टिप्पणियां देखकर जियांग परेशान हो गईं। उन्हें लगा कि छोटे बाल कटवाकर सैन का समर्थन करने के साथ महिलाओं की आजादी का मुद्दा भी उठा सकेंगे।

सोशल मीडिया पर सैन को समर्थन मिल रहा है। कई महिलाओं ने अपने बाल कटाकर फोटो शेयर की है।
सोशल मीडिया पर सैन को समर्थन मिल रहा है। कई महिलाओं ने अपने बाल कटाकर फोटो शेयर की है।

इसके बाद तो अभियान पूरे देश में फैल गया। तमाम महिलाएं बाल छोटे कराने से पहले और बाद की तस्वीरें पोस्ट करने लगीं। दरअसल, द. कोरिया में पुरानी पीढ़ी के पुरुष सोचते हैं कि उनका दर्जा महिलाओं से ऊपर हैं, वहीं युवा पीढ़ी को लगता है कि सारी ताकत महिलाओं के हाथ में है और वे नारीवादी सोच के बल पर पुरुषों को प्रताड़ित कर रही हैं।

पुरुषों के गुस्से की बड़ी वजह क्या है

दक्षिण कोरिया में पुरुषों के गुस्से की एक वजह यह भी है कि यहां 18 से 35 साल तक के पुरुषों के लिए दो साल सेना में रहना जरूरी है। लेकिन आज की पीढ़ी इसमें विश्वास नहीं रखती। उन्हें लगता है कि इससे न सिर्फ उनके दो साल, बल्कि चोट लगने पर पूरी उम्र ही बर्बाद हो जाती है। जबकि इसी उम्र में महिलाएं सरकारी नियमों की बदौलत ऐसी इंडस्ट्रीज में पैठ बना लेती हैं, जहां कभी पुरुषों का वर्चस्व रहा करता था।

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