Friday, September 17, 2021
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रक्षा बंधन पर बहन के त्याग की कहानी

आज रक्षाबंधन के पर्व पर हर बहन अपने भाई के कलाई में रक्षा सूत्र बांध रही है। छत्तीसगढ़ में भी पर्व उत्साह से मनाया जा रहा है। वहीं बिलासपुर की एक बहन उषा अपने भाई को याद कर रही हैं। भाई की जान बचाने के लिए 21 साल पहले उन्होंने अपनी एक किडनी दान कर दी थी, लेकिन इतने बड़े त्याग के बावजूद कोरोना काल में उनकी जान चली गई।

दरअसल, 21 साल पहले कोरबा में SECL में काम करने वाले युगल शर्मा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों से जांच कराने पर पता चला कि किशोर की दोनों किडनी खराब है। जल्द डोनर नहीं मिलने पर उनकी मौत हो सकती है। परिवार के सभी सदस्य उनके जीवन को इस संकट से निकालने की कोशिश कर रहे थे। वेल्लूर में ऑपरेशन के समय में दो भाई का टेस्ट हुआ, पर उनकी किडनी मैच नहीं हुई।

भाई की तकलीफ बहन से देखी नही जा रही थी। ऐसे में कश्यप कॉलोनी निवासी उषा चौबे ने 1999 में अपने बड़े भाई युगल किशोर शर्मा के जीवन में आए संकट को दूर करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी एक किडनी भाई को दे दी। उषा चौबे कहती हैं कि बचपन में बिताए पल उन्हें याद आ रहे थे। ईश्वर की कृपा से सभी टेस्ट भी सफल रहे।

शुरुआत में परिवार वालों को हुई चिंता, लेकिन बाद में सराहा

उषा बताती हैं कि उनके इस फैसले से बुजुर्गों को उनके स्वास्थ्य के लिए काफी चिंता थी। उषा के भी बच्चे छोटे थे, लेकिन बाद में ससुराल और घर के लोगों ने उनके इस फैसले को सराहा। पति लव चौबे बताते है कि, कठिन परिस्थिति में जैसे ही पता चला कि युगल को किडनी देनी है तो उषा ने खुद निर्णय लिया। परिवार के लोग थोड़े परेशान जरूर थे पर सभी ने समझा कि एक किडनी से भी जीवन चल सकता है।

उषा के पुत्र सभ्यसांची कहते हैं कि मां ने जब यह निर्णय लिया था तब वे काफी छोटे थे। अब 21 वर्ष पूर्व लिए गए उनके निर्णय के बारे में सोचता हूं तो लगता है कि मां का लिया गया बहुत बड़ा था। जब कभी सोचता कि अपने ही शरीर का एक अंग दान करना हो घबराहट सी महसूस करता हूं। बहू गरिमा का कहना है उनकी सास को व्यवहार ही त्याग का है उन्होंने अपने अंग का दान दिया वो हमें प्रेरणा देती है।

जीवन बचा नही पाई लेकिन 21 साल बढ़ा दिए

उषा चौबे बताती है की उन्हें कभी किसी भी तरह की स्वास्थ संबंधी दिक्कत नही हुई। अभी वह पूरी तरह से स्वस्थ है। अंत में उन्होंने कहा कि मैं अपने भैया की जान बचा तो नही पाई लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने उनका जीवन 21 साल बढ़ा जरूर दिया था।

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