Sunday, September 26, 2021
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दूसरी बार खोला गया सुखना लेक का गेट, कई इलाकों में अलर्ट जारी

चंडीगढ़ प्रशासन अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। इसलिए जैसे ही सुखना लेक का जल स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचता है, इंजीनियरिंग विभाग पूरी एहतियात बरतते हुए सुखना लेक का गेट खोल रहा है। सोमवार को ही वाटर लेवल 1162.6 फीट से ऊपर पहुंचने पर 1 घंटा 10 मिनट के लिए सुखना लेक का एक फ्लड गेट खोलकर डेढ़ इंच पानी छोड़ा गया था। शनिवार को भी जैसे ही सुखना लेक का वॉटर लेवल 1162.7 तक पहुंचा, इंजीनियरिंग विभाग ने तुरंत गेट खोलने के आदेश दे दिए।दरअसल शनिवार सुबह करीब एक घंटे तक 18.3 MM बारिश हुई, जिसके बाद सुखना लेक का वाटर लेवल बढ़ गया। इसलिए फ्लड गेट खोलना पड़ा। ऐसा पहली बार ही हुआ है कि एक हफ्ते में दूसरी बार फ्लड गेट खोलना पड़ा हो। पानी छोड़ने से पहले सुखना लेक के साथ लगते बापूधाम, इंडस्ट्रियल एरिया, बलटाना और मोहाली के अन्य रेजिडेंशियल एरियाज को अलर्ट किया गया और साथ ही सायरन भी बजाया गया। किशनगढ़ और बापूधाम में इलाके के SDM और पुलिस अधिकारियों की पहले से ही लगातार नजर बनी हुई है।

बता दें कि सुखना लेक का फ्लड गेट खोलकर घग्गर नदी में पानी भेजा जाता है। इससे पहले 8 अगस्त यानी रविवार को सुखना लेक का वाटर लेवल खतरे के निशान से महज 0.7 फीट नीचे रह गया था। सोमवार सुबह एक बार फिर जब बारिश हुई तो पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया और आखिरकार फ्लड गेट सुबह 11:30 बजे खोल दिया गया था।

पिछले साल जलमग्न हो गए थे बलटाना के कई इलाके प्रशासन इसलिए भी स्तर्क है क्योंकि पिछले साल जब सुखना लेक के फ्लड गेट खोले गए थे तो यहां से निकले पानी ने बलटाना में कहर मचा दिया था। गेटों के खोलते ही पानी काफी तेजी से निचले स्थानों की ओर बहने लगा। मिनटों में कई स्थानों से होता हुआ यह पानी बलटाना में पहुंच गया। बलटाना पुलिस चौकी पूरी तरह से पानी में डूब गई थी। सड़कों पर भी काफी पानी जमा हो गया था और कई गाड़ियां भी पानी में डूब गई थीं। इसलिए इस बार प्रशासन पहले से ही अलर्ट है और एडवाइजर धर्मपाल ने भी पहले ही UT इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को निर्देश दिए हुए हैं कि सुखना लेक पर नजर रखें ताकि शहर या आसपास किसी भी तरह की बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।

पिछले साल अगस्त में जलस्तर खतरे के स्तर पर पहुंचने के बाद सुखना लेक के फ्लड गेट खोलकर सुखना चौ के रास्ते से पंचकूला स्थित घग्गर नदी में पानी भेजा गया था। इसके अलावा साल 2018 में भी कैचमेंट एरिया में बारिश होने के कारण अथॉरिटीज को दो फ्लड गेट खोलने पड़े थे। उस वक्त 10 साल के बाद ये फ्लड गेट खोले गए थे।

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