Friday, September 17, 2021
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कोरोना महामारी से टेक्सटाइल बेहाल : एक माह में ढाई सौ करोड़ रुपए का नुकसान

कोरोना महामारी ने आम से लेकर खास तक की कमर तोड़ दी है। पिछले डेढ़ साल से लोग राहत की सांस नहीं ले पाए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान काराेबारियों को उठाना पड़ा है, खासकर कपड़ा व्यापारियों को। टेक्सटाइल मार्केट से मंदी के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्थिति यह है कि व्यापारियों काे लागत से भी कम कीमत पर कपड़े बेचना पड़ रहा है।

कारोबारियों का कहना है कि दूसरी लहर से अभी भी कई राज्य उबर नहीं पाए हैं। दक्षिण भारत के कई शहरों में तो कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। इस कारण वहां से डिमांड बिल्कुल नहीं है। इस माह तो करीब 250 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है जबकि 300 करोड़ रुपए से अधिक का माल अटका पड़ा है।

कारोबारियों को उम्मीद, दीपावली पर मार्केट में आ सकती है जगमगाहट।
कारोबारियों को उम्मीद, दीपावली पर मार्केट में आ सकती है जगमगाहट।

मार्च से जुलाई तक पड़ने वाले त्योहार और शादियों के सीजन में भी कपड़ों की डिमांड कम ही रही। जबकि माल बनकर तैयार था। नौबत ऐसी आ गई है कि लॉट में कपड़े को निकालना पड़ रहा है। यानी लागत मूल्य या फिर नुकसान उठाकर बेचना पड़ रहा है। कपड़ा व्यापारी अरुण पाटोदिया ने बताया कि पैसों का रोटेशन करने के लिए व्यापारी कम दाम में भी कपड़ा बेचने को मजबूर हैं। कुछ व्यापारी तो लागत से भी कम मृूल्य पर माल देने को तैयार हैं। व्यापारियों का पुराना पेमेंट नहीं आने से और ज्यादा परेशानी हो रही है।

अगस्त से त्याेहारों की सीजन शुरू हो जाता है। रक्षा बंधन, गणेश पूजा, इसके बाद फिर नवरात्र और दीपावली। कारोबारियों को उम्मीद है कि दीपावली से बाजारों में फिर से रौनक आ सकती है, क्योंकि छठ पूजा के बाद से शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा।

किसी भी मंडी से डिमांड नहीं आ रही

कपड़ा व्यापारी दिनेश कटारिया ने बताया कि किसी भी मंडी से डिमांड नहीं है। मार्च के बाद से त्योहारों और शादियों के सीजन फेल हो गए। अब दीपावली से अच्छे कारोबार की उम्मीद है। चिंता इस बात की है कि अब भी देश की मंडी पूरी तरह खुल नहीं पाई है।

300 करोड़ से ज्यादा का माल अटका पड़ा है, इसे निकालना बड़ी चुनौती।
300 करोड़ से ज्यादा का माल अटका पड़ा है, इसे निकालना बड़ी चुनौती।

व्यापारियों को 1250 करोड़ का कपड़ा 1000 करोड़ रुपए में ही बेचना पड़ा

15 जुलाई से 10 अगस्त तक करीब 1000 करोड़ रुपए का कपड़ा लॉट में बेचा जा चुका है। इसमें 20% यानी 250 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। किसी ने सोचा नहीं था कि अंडर कॉस्टिंग कर 1000 करोड़ का माल बेचना पड़ेगा, लेकिन हालात ही ऐसे बने हुए हैं। गुड्स रिटर्न के कारण छोटेे व्यापारियों को भी कपड़ा लॉट में बेचना पड़ रहा है। अब दिवाली को लेकर बड़ी उम्मीद है। :-सूरत मर्केन्टाइल एसोसिएशन

कपड़ा तैयार है, पर ऑर्डर नहीं मिल रहा

कपड़ा एजेंसी का काम करने वाले ने बताया कि वर्तमान स्थिति इतनी खराब है कि कहीं से ऑर्डर ही नहीं आ रहा है। हर एक व्यापारी के पास स्टॉक पड़ा हुआ है। मजबूरी यह है कि पुराना स्टॉक भी निकालना जरूरी है। ऐसे में लॉट में यानी कपड़े को कम कीमत पर भी निकालने की कोशिश की जा रही है। लॉट में माल निकालने के लिए भी कारोबारी 5 से 10 कॉल हर रोज कर रहे हैं।

लागत मूल्य पर भी नहीं बिक रहीं साड़ियां

कपड़ा व्यापारी ने बताया कि सीजन में रेनियल प्रिंट साड़ियां 135 रुपए में आसानी से निकल जाती थीं, लेकिन अभी स्थिति यह है कि 120 रुपए में भी कोई लेने को तैयार नहीं है। गुजरात ही नहीं पूरे देश में कोरोना की वजह से व्यापार काफी सुस्त है। हालांकि, अब दूसरी लहर शांत हो गई है। उम्मीद है कि एक से दो माह में बाजार एक बार फिर से पटरी पर लौटने लगेगा।

ग्रे की भी सही कीमत नहीं मिल रही

वीवर्स सनी दलाल ने बताया कि डिमांड नहीं होने के कारण व्यापारी ग्रे की खरीदारी लागत से भी कम मूल्य पर करना चाह रहे हैं। ऐसे हालत पिछले कई महीनों से बने हुए हैं। मुश्किल यह है कि दूसरी लहर के बाद भी राहत की उम्मीद नहीं दिख रही है।

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