Sunday, September 19, 2021
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सूरत : 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की मंजूरी, 24 हफ्ते के गर्भ से जान का खतरा

अहमदाबाद. सूरत की 14 वर्षीय नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को हाईकोर्ट ने 24 सप्ताह का गर्भपात कराने की मंजूरी दे दी है। जस्टिस एसएच वोरा ने सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट के आधार पर यह मंजूरी दी है। रिपोर्ट में गर्भ से नाबालिग की जान को खतरा बताया गया था। हाईकोर्ट ने पीड़िता के लिए लीगल एड अथॉरिटी चेयरमैन को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। गर्भ की डीएनए जांच करवाने का आदेश भी दिया है।

 

नाबालिग के साथ उसके जीजा ने कई बार दुष्कर्म किया था। बता दें कि देश में कानूनन सामान्य परिस्थितियों में 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ के गर्भपात की मंजूरी नहीं है। एडवोकेट रफीक लोखंडवाला ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के सेक्शन 5 के मुताबिक़ दलीलें दीं। जान के खतरे के साथ ही उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बच्ची एक हाथ में किताब होनी चाहिए उस उम्र में हाथ में यदि बच्चा होगा तो वो मानसिक रूप से मरने के बराबर होगा।

 

गर्भ का देर से पता चला, पर खतरा तो अब भी है 
करीब 24 सप्ताह बाद गर्भ का पता तब चला था जब नाबालिग को पेटदर्द होने पर डॉक्टर को दिखाया था। डॉक्टरों के पैनल ने रिपोर्ट में बताया कि 24 सप्ताह के गर्भ से पीड़िता की मानसिक और शारीरिक दोनों स्तर पर खतरा है। इसी के आधार पर गायनोकोलॉजिस्ट की पैनल ने गर्भपात की सिफारिश की थी। गायनोकोलॉजिस्ट सोनिया चंदनानी का कहना है कि खतरा अब भी है। सामान्य तरीके से प्रसव करवाया जाता है तो जननांग पर असर पड़ेगा और इतनी कम उम्र में सीजेरियन में भी खतरा रहेगा।

 

बच्चों के साथ क्रूर यौन अपराध पर फांसी की सजा से जुड़ा पॉक्सो एक्ट का संशोधन राज्यसभा में पारित 
बच्चों के साथ दुष्कर्म और क्रूर यौन अपराधों के दोषियों को फांसी की सजा से जुड़ा पॉक्सो एक्ट का संशोधन बुधवार को राज्यसभा में पारित हो गया। सभी दलों के सदस्यों के समर्थन से यह बिल ध्वनिमत से पारित हुआ। यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (संशोधन) बिल 2019 मंगलवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने पेश किया था। रास से पारित होने के बाद इसे लोकसभा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

 

6 साल से छोटे बच्चों के साथ यौन अपराध पर 20 साल की जेल 
बिल में 16 वर्ष से छोटे बच्चों के साथ यौन अपराध पर कम से कम 20 साल की सजा का प्रावधान है। इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास कर सकते हैं। क्रूर यौन हिंसा के मामलों में 20 साल तक की कठोर सजा के प्रावधान के साथ मृत्युदंड भी दिया जा सकता है। 20 साल की सजा ताउम्र तक भी बढ़ाई जा सकती है।

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