Saturday, September 25, 2021
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राजस्थान : बदलाव की सरहद से: सुनहरी रोशनी में नहाया बॉर्डर अब एलईडी से लैस हो रहा है, 55% बिजली बचाएगा बीएसएफ

श्रीगंगानगर. अंतरिक्ष से दिखने वाले भारत पाक की सीमा पर लगी सोडियम लाइटों की स्वर्णिम रोशनी 5 साल बाद एलईडी की चांदी सी रोशनी में जगमगाएगी। गृह मंत्रालय ने 2017 में यहां एलईडी लगवाने काम शुरू करवाया है, जो दस फेज में पूरा होगा। अभी 10260 पोल पर 41040 सोडियम लैम्प लगे हुए हैं। अभी एक पोल पर 4 लैम्प लगे हैं। जबकि बदलाव के बाद एक पोल पर 3 एलईडी लगाई जा रही है। पांच साल में ये प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद 30 हजार 780 एलईडी लग जाएगी। अभी रोजाना औसतन एक पोल पर 12 यूनिट बिजली की खपत हो रही है। रोजाना 1.23 लाख तथा एक माह में 36.93 लाख यूनिट बिजली की खपत होती है। बदलाव के बाद 55% बिजली की बचत होगी।

अंतरिक्ष से दिखती है हमारी सरहद, अब ये रोशनी दूधिया होगी

  • एलईडी लगने से हर माह 16.61 लाख यूनिट बिजली की खपत होगी। अभी 36.93 लाख यूनिट की खपत है।
  • बिजली का बिल 1.32 करोड़ रुपए होगा, 1.57 करोड़ की हर माह बचत। अभी मासिक बिल 2.90 करोड़ है।
  • 60 करोड़ की लागत से एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं। 1.66 करोड़ से 262 डीजी सेट बदलेंगे। 2040 किमी. लाइन बिछाई गई।
  • नासा ने सितंबर 2015 में एक तस्वीर जारी की थी जिसमें अंतरिक्ष से भारत-पाक सीमा की सुनहरी लकीर दिख रही है। अब 10 फेज में इस सुनहरी रोशनी को एलईडी लाइटों से बदला जा रहा है
  • श्रीगंगानगर में नहर के साथ लगी सोडियम लाइटों के साथ ही एलईडी लाइटें भी दिख रही हैं। पहले फेज में 86 किमी में लाइटें बदली जा चुकी हें। दूसरे फेज में 150 किमी के दायरे में लाइटें बदली जा रही हैं।

श्रीगंगानगर में नहर के साथ लगी सोडियम लाइटों के साथ ही एलईडी लाइटें भी दिख रही हैं।

जहां रातों-रात जगह बदलते हैं 80 फीट ऊंचे धोरे, वहां भी लगेगी 60 फीट की हाई मास्ट लाइट

राजस्थान सीमा पर शाहगढ़ बल्ज का 30 किमी का इलाका, जहां पर 80 से 100 फीट ऊंचे रेत के धोरे हवा के साथ जगह बदलते रहते हैं। यहां निगरानी तो क्या तारबंदी को संभालना भी मुश्किल हो जाता है। अब 72 साल में पहली बार इस क्षेत्र में बिजली पहुंच रही है। पहली बार यहां 40 से 60 फीट ऊंची हाई मास्ट लाइट लगाई जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 15 दिन पहले ही 32 करोड़ का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया है।

इसका टेंडर इस माह खुलने वाला है, इसके बाद मार्च में हाई मास्ट लाइट लगाने का काम शुरू हो जाएगा। सीपीडब्ल्यूडी की बॉर्डर फ्लड लाइट यूनिट के एक्सईएन चेतनराज मीणा कहते हैं कि यहां लगने वाली लाइटों का फाउंडेशन ही चार मीटर तक की होगी। इस क्षेत्र में फ्लड लाइटें और सोलर पैनल लगाने के प्रयास पहले विफल हो चुके थे। स्थाई समाधान के लिए निजी एजेंसी ने 100 प्वाइंट पर सर्वे किया था। इनमें रेत के कण की डेनसिटी, इतनी क्यों उड़ती है, पानी कितनी गहराई पर है, लाइट कैसे लगाई जा सकती है, जैसे प्वाइंट शामिल थे। इस आधार पर यहां हाई मास्ट लाइटें लगाने का निर्णय किया गया।

 

 

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