Friday, September 17, 2021
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केंद्र ने संसदीय समिति से वादा किया था वैक्सीन डोज 250 रुपए से महंगी नहीं होगी, डेढ़ महीने पहले ही संसदीय समिति ने उठाए थे सवाल

कोविड वैक्सीन की केंद्र, राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों के लिए अलग-अलग कीमत सामने आने पर इस समय बवाल मचा हुआ है। लेकिन, यह विवाद नया नहीं है। संसद की स्थायी समिति ने बहुत पहले ही कोविड वैक्सीनेशन के लिए फंडिंग के तौर-तरीके पर सवाल उठाए थे।

समिति के समक्ष चली गवाही में सरकार के प्रतिनिधियों ने बताया था कि सरकार ने चिह्नित प्राइवेट अस्पतालों में 1 मार्च से टीकाकरण की अनुमति दे दी है और टीके प्रति डोज की कीमत 250 रु या उससे नीचे ही रहेगी।

इस आश्वासन के बाद समिति ने उम्मीद जताई थी कि इस कदम से टीकाकरण अभियान में तेजी आएगी। बजट के समय इस बात के अनुमान लगाए गए थे कि 35 हजार करोड़ रु के आवंटन से तकरीबन 150 करोड़ टीके खरीदे जा सकेंगे। एक व्यक्ति को दो डोज के हिसाब से 75 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो जाएगा। इस तरह भारत की आधी आबादी को कोविड का सुरक्षा कवच मिल जाता।

पहले ही तय था राज्यों को अनुदान मांगों के तहत दिया जाएगा वैक्सीन फंड का पैसा

बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैक्सीन के लिए उन्होंने 35 हजार करोड़ रुपए की विशेष रूप से व्यवस्था करने का ऐलान किया था। इसके एक महीने बाद संसद की स्थायी समिति में हुए विचार विमर्श के दौरान यह बात खुलकर सामने आई कि कोविड टीकाकरण के लिए राज्यों को अनुदान मांगों के तहत सीधे यह राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव की अध्यक्षता वाली स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने राज्यों को पैसा दिए जाने पर कड़ा एतराज किया था। संसद में 8 मार्च को पेश की गई रिपोर्ट में समिति ने हैरानी जताई कि ऐसा क्यों किया कि जा रहा है, जबकि कोविड वैक्सीन की नोडल एजेंसी स्वास्थ्य मंत्रालय है। उस समय यह साफ नहीं था कि वैक्सीन कंपनी केंद्र और राज्यों के लिए अलग-अलग कीमत रखेगी।

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