Wednesday, September 22, 2021
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अतिक्रमणकारियों ने रोका गहरीकरण का काम

गुना। जिले में इस साल हुई मूसलाधार बारिश ने नदी-नालों पर हुए अतिक्रमण की पोल खोल दी थी। शहर में लंबे समय बाद इस तरह की भयानक बारिश का मंजर सामने आया। कॉलोनियां तालाब बन गईं थी। सड़कों पर पानी ही पानी नजर आ रहा था। इस साल सामान्य औसत बारिश से ज्यादा बारिश हो चुकी है।शहर में इस साल भारी बारिश के बाद आई बाढ़ से वे ही इलाके प्रभावित हुए जो नदी-नालों या तालाब की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बसे थे। इस ओडिया नदी भी शामिल है, जिसके प्रवाह क्षेत्र में सैकड़ों की तादाद में मकान बन गए हैं। गुरुवार को जब इस नदी की सफाई व उसे चौड़ा करने का काम शुरू हुआ तो एक बार फिर भू-माफिया सक्रिय हो गए। उन्होंने कुछ ही देर में जबरन काम रुकवा दिया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह ने काम की शुरूआत करवा दी थी। कुछ देर काम चलता रहा। जब वे वापस आ गए तो मौके पर कुछ लोग पहुंच गए। उन्होंने वहां काम कर रहे कर्मचारियों को धमकाया और जेसीबी को वापस ले जाने के लिए मजबूर कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पराग एवं लोकेश शर्मा ने बताया कि गुरुवार को भोपाल से बाढ़ नियंत्रण को लेकर एक टीम पहुंची थी। अधिकारी बैठक में व्यस्त थे। इसलिए मौके पर कोई नहीं पहुंच पाया।

जहां नदी बहती थी अब वहां बस गई कालोनी

गुना में पहली बार ओड़िया नदी बाढ़ की वजह बनकर सामने आई। इससे पहले गुनिया और पनरिया नदी की बाढ़ का प्रकाेप ही देखने मिला है। इसकी वजह साफ है कि ओड़िया नदी का प्रवाह क्षेत्र शहरीकरण से मुक्त था। तीन दशक पहले कभी जब नदी उफनी भी होगी तो सारा पानी आसपास के खेतों में ही भरकर रह गया होगा। अब हालात बदल गए हैं। नदी को ही बाधित कर दिया गया। भू-माफियाओं ने जमीन बेच दी और खामियाजा भुगत रहे हैं वे लोग जिन्होंने प्लॉट खरीदे। यही स्थिति गुनिया नदी पर कब्जा करके बसाई गई गोविंद गार्डन कालोनी की है, जहां आज भी पानी से लोग परेशान हैं। यहां तो 40 फीट की गुनिया को मात्र 5 फीट की नाली में तब्दील कर दिया गया है।

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