Tuesday, September 28, 2021
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दंतेवाड़ा में मौत के बाद परिवार ने साथ छोड़ा, पालिकाध्यक्ष ने दी मुखाग्नि

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के मामले जरूर कम होते जा रहे हैं, लेकिन उनके साथ संवेदनाएं का मरना जारी है। बीमारी के समय अपने ही अपनों का साथ छोड़ रहे हैं। मौत के बाद अपने ही दूरी बना ले रहे हैं। कोई हाथ लगाने को तैयार नहीं हो रहा है। ऐसे में दंतेवाड़ा में किरंदुल के पालिकाध्यक्ष मृणाल राय लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। वहीं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में कोरोना के डर से वृद्धा को खंडहर में छोड़ दिया तो पुलिस कांस्टेबल ने उसे घर पहुंचाया।

दंतेवाड़ा में किरंदुल के पालिकाध्यक्ष मृणाल राय लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
मृणाल राय कहते हैं कि किरंदुल क्षेत्र ही उनका घर है। यहां का हर वर्ग का व्यक्ति मेरे परिवार का सदस्य है।
मृणाल राय कहते हैं कि किरंदुल क्षेत्र ही उनका घर है। यहां का हर वर्ग का व्यक्ति मेरे परिवार का सदस्य है।

 

कभी बेटा, कभी भाई बनकर निभाई अंतिम रस्में

किरंदुल में अब तक 16 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। ऐसे में उनकी मदद के लिए नगर पालिका अध्यक्ष मृणाल राय (50) खुद पहुंच जाते हैं। दाह संस्कार के लिए सारी व्यवस्था करते हैं। लकड़ियां तक खुद जुटाते हैं। एक परिवार में 3 लोगों की मौत हो गई। परिवार में इतना डर हो गया कि उन्होंने शवों को हाथ तक नहीं लगाया। ऐसे में मृणाय राय ने PPE किट पहनकर कभी भाई और कभी बेटा बनकर उन शवों का अंतिम संस्कार किया।

किरंदुल में अब तक 16 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। ऐसे में उनकी मदद के लिए नगर पालिका अध्यक्ष मृणाल राय खुद पहुंच जाते हैं।
किरंदुल में अब तक 16 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। ऐसे में उनकी मदद के लिए नगर पालिका अध्यक्ष मृणाल राय खुद पहुंच जाते हैं।

 

किरंदुल शहर मेरा घर, हर व्यक्ति परिवार का सदस्य

मृणाल राय कहते हैं कि किरंदुल क्षेत्र ही उनका घर है। यहां का हर वर्ग का व्यक्ति मेरे परिवार का सदस्य है। ऐसे में परिवार के किसी भी सदस्य को तकलीफ हो तो देखा नहीं जाता। जब तक जिंदा हूं, लोगों की सेवा में लगा रहूंगा। लोगों की मदद करना अच्छा लगता है। इसमें पत्नी भी साथ देती हैं। जब किसी घर के सदस्य की मौत होती है तो तकलीफ मुझे होती है। कोरोना काल की पहली और दूसरी लहर में मेरे साथ नगर पालिका की पूरी टीम भी जुटी रहती है।

कोरोना के डर से परिजनों ने 65 साल की एक वृद्धा को खंडहर में छोड़ दिया। कांस्टेबल सत पूरन जांगड़े को पता चला तो वह खाट सहित घर लाए और परिजनों को समझाया।
कोरोना के डर से परिजनों ने 65 साल की एक वृद्धा को खंडहर में छोड़ दिया। कांस्टेबल सत पूरन जांगड़े को पता चला तो वह खाट सहित घर लाए और परिजनों को समझाया।

 

कोरोना से ठीक होकर लौटी वृद्धा तो परिजन खंडहर में छोड़ आए

GPM जिले में मरवाही के लोहारी गांव में कोरोना के डर से परिजनों ने 65 साल की एक वृद्धा को खंडहर में छोड़ दिया। संक्रमित होने के बाद महिला को कोविड सेंटर में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य में सुधार होने पर 5 दिन बाद उसे छुट्टी दे दी गई। परिजनों से होम आइसोलेशन में रखकर दवा देने को कहा गया, लेकिन वह डर के चलते घर से दूर खंडहर में छोड़ आए। कांस्टेबल सत पूरन जांगड़े को पता चला तो वह खाट सहित घर लाए और परिजनों को समझाया। तब जाकर कहीं घरवाले माने।

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