Sunday, September 26, 2021
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निर्भया केस : दोषी विनय ने दया याचिका खारिज होने को चुनौती दी, सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

नई दिल्ली. निर्भया के गुनहगार विनय शर्मा की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। उसने दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के फैसले को चुनौती दी है। वकील एपी सिंह के जरिए दायर अर्जी में विनय ने कहा कि वह मानसिक रूप से बीमार है और कानूनन मानसिक रोगी को फांसी नहीं दी जा सकती। राष्ट्रपति ने 1 फरवरी को विनय की दया याचिका खारिज कर दी थी।

याचिका में विनय ने कहा कि तिहाड़ में लगातार टार्चर किए जाने से उसे ‘इमेंस साइकोलॉजिकल ट्रॉमा’ नाम की मानसिक बीमारी हो गई है। उसने जेल में इलाज के दस्तावेज देते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की।

सजा में देरी: निर्भया की मां पटियाला हाउस कोर्ट में रो पड़ीं

उधर, दोषियों का नया डेथ वॉरंट जारी करने की मांग पर बुधवार को ट्रायल कोर्ट में सुनवाई हुई। निर्भया के माता-पिता और दिल्ली सरकार की ओर से इसके लिए याचिका दायर की गई है। अदालत में दोषी पवन गुप्ता ने कहा कि उसके पास कोई वकील नहीं है, इस पर अदालत ने उसे कानूनी मदद देने की पेशकश की। दोषी को सहायता देने की बात पर निर्भया की मां ने कोर्ट में कहा- मामले को 7 साल हो चुके हैं। मैं भी इंसान हूं, मेरे अधिकारों का क्या होगा? मैं आपके सामने हाथ जोड़ती हूं, कृपया डेथ वॉरंट जारी कर दीजिए। इसके बाद निर्भया की मां कोर्ट में रो पड़ीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सुनवाई गुरुवार तक स्थगित की।

दोषी अपनी आखिरी सांस तक कानूनी मदद का हकदार
पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा- कोई भी दोषी अपनी आखिरी सांस तक कानूनी मदद पाने का हकदार है। कोर्ट ने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को वकीलों की सूची दोषी पवन को सौंपने के निर्देश दिए। वहीं, पवन को अपनी पसंद का वकील चुनने की इजाजत भी दी। इसके बाद दिल्ली विधिक सहायता प्राधिकरण (डीएलएसए) ने पवन के पिता को वकीलों की सूची सौंपकर अपने वकील का चुनाव करने को कहा।

अलग-अलग फांसी देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
इससे पहले, निर्भया के दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की मांग को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अदालत ने चारों दोषियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। जस्टिस आर भानुमति की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस अशोक भूषण और एएस बोपन्ना की बेंच 14 फरवरी को इस मामले में सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस सुनवाई का ट्रायल कोर्ट द्वारा नया डेथ वारंट जारी करने के मामले पर असर नहीं पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने अलग-अलग फांसी देने की मांग खारिज की थी

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 फरवरी को कहा था- निर्भया के चारों दुष्कर्मियों को अलग-अलग फांसी नहीं दी जा सकती। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि दोषी को 7 दिन में अपने सभी कानूनी विकल्प पूरे करने होंगे। हालांकि, अब तक दोषी पवन ने क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका का इस्तेमाल नहीं किया है।
  • 31 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के चारों दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। दोषियों को 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी दी जानी थी। इसके बाद केंद्र और तिहाड़ जेल प्रशासन ने इस फैसले के लिए खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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