Thursday, September 16, 2021
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पटना : हाईकोर्ट की खरी-खरी: नगर निगम तुगलकी फरमान जारी करना बंद करे

पटना. हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पटना नगर निगम के एक कारनामे पर बेहद तल्खी दिखाई। यहां तक कह दिया कि ‘निगम तुगलकी फरमान जारी करना बंद करे।’ दरअसल, निगम ने श्रीकृष्णापुरी के दो भूखंडों का लीज आवंटन रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने न सिर्फ निगम के आदेश को रोक दिया, बल्कि इस बारे में उससे 3 हफ्ते में जवाब भी मांगा। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की एकल पीठ ने दोनों भूखंड के आवंटी रमेश कुमार (प्लॉट-32ए) तथा अजित कुमार (प्लॉट-43बी) की रिट याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ 
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता पीके शाही तथा अरुण कुमार ने बताया कि आवासीय भूखंड के व्यावसायिक इस्तेमाल पर निगम की ओर से मिले नोटिस का जवाब निगम में दाखिल किया गया है। लेकिन इस पर विचार किए बिना ही निगम ने भूखंड का आवंटन रद्द कर दिया। शाही का कहना था कि 32ए पर कई वर्षों से स्कूल चल रहा है। भूखंड मालिकों से निगम टैक्स भी वसूल रहा है पर बगैर किसी सूचना के भूखंड लीज आवंटन को रद्द करने का आदेश दे दिया। यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।

1972 में प्लॉट का आवंटन, तब से टैक्स वसूल रहा नगर निगम 
अधिवक्ता विकास कुमार के मुताबिक 1972 में प्लॉट का आवंटन किया गया। 2014-15 में निगम ने इसका कमर्शियल रेट तय किया। तब से यह जमा किया जा रहा है। अव्वल तो नगर निगम को लीज रद्द करने का अधिकार ही नहीं है। सक्षम न्यायालय ही किसी लीज को रद्द कर सकता है। यह सब सुनने के बाद कोर्ट ने नगर निगम के खिलाफ तुगलकी फरमान जारी नहीं करने वाली टिप्पणी की। दूसरी तरफ, निगम के वकील का कहना था कि भूखंड का आवंटन केवल आवासीय इस्तेमाल के लिए किया गया था।

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