मोटरबोट के इंजन में तीन साल से है समस्या 15 की क्षमता है मगर 24 लोग सवार थे

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दंतेवाड़ा . 3 साल पहले प्रशासन ने जिले के प्रमुख घाटों के लिए मोटर बोट उपलब्ध कराई थी। इसके बाद से ही मोटर के इंजन में समस्या है। अगस्त 2017 को भी तत्कालीन सहायक आयुक्त आनंद जी सिंह अपनी टीम के साथ नदी पार गांवों का दौरा कर लौट रहे थे। ऐसे में उफनती नदी के बीच मोटर बोट बंद हो गई थी। मेंटेनेंस की तरफ प्रशासन का ध्यान ही नहीं है। इस मोटर बोट की क्षमता 15 लोगों की है जबकि सेामवार को इसमें 24 लाेग सवार हो गए थे। घटना के बाद कलेक्टर, एसपी खुद पहुंचे।

एसपी डॉ अभिषेक पल्लव, एएसपी सूरज सिंह परिहार, पुलिस विभाग के सारे डीएसपी भारी बारिश के बीच भी करीब साढ़े तीन घंटे नदी घाट पर डटे थे। यहां फंसे ग्रामीणों को जल्द सुरक्षित निकालने की उम्मीद दिलाते रहे। शाम करीब 4 बजे कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा भी पहुंचे। इनके पहुंचने के 15 मिनट बाद गोताखोरों की टीम पहुंची। इस लेट लतीफी पर अफसरों ने गोताखोरों की टीम पर नाराजगी जताई।

इंद्रावती नदी कोडनार घाट में सोमवार को नदी के बीचोंबीच ग्रामीणों से भरी मोटर बोट खराब हो गई। तुमरीगुंडा, चेरपाल, हांदावाड़ा, मंगनार, कौशलनार की तरफ से ग्रामीण नदी पार कर बारसूर की ओर आ रहे थे। उफनती नदी के बीच मंझधार में मोटर बोट का इंजन बंद हो गया। रस्सी से बोट चालू करने की कोशिश नाविक व ग्रामीण करते रहे, लेकिन रस्सी टूट गई। नाविक छब्बू राम कड़की व ग्रामीण दल्लूराम ने छलांग लगाकर ग्रामीणों से भरी मोटर बोट को रस्सी के सहारे किसी तरह खींचा, बोट में बैठे ग्रामीण चप्पू चलाते रहे, चीख पुकार मचनी शुरू हो गई।

बोट में सवार ग्रामीण इतने घबरा गए कि नदी में कूदने वाले थे। बोट में हांदावाड़ा के बालक आश्रम में पदस्थ शिक्षक रामचंद्र बघेल भी सवार थे। शिक्षक ने सभी ग्रामीणों को नदी में छलांग लगाने से रोक दिया। शिक्षक ने ग्रामीणों की हिम्मत बढ़ाई और कहा कि कोई भी नदी में छलांग मत लगाना, नदी में छलांग लगाओगे तो मर जाओगे।

सभी हौसला बनाए रखो। इसके बाद नाविक से कहा- रस्सी लेकर तुम कूदो और रस्सी मत छोड़ना, हम पकड़े हैं। शिक्षक के हौसला बढ़ाते ही सभी शांत हुए। इसके बाद घटनास्थल से 50 मीटर दूर नदी के बीच चट्टान में मोटर बोट को सुरक्षित पहुंचाया गया। यहां से एक ग्रामीण ने बारसूर टीआई को फोन कर जानकारी दी कि सर हम नदी में फंस गए हैं। करीब आधे घंटे बाद लोगों का जमावड़ा घाट किनारे लगना शुरू हुआ और मदद की उम्मीद जाग उठी।

दैनिक भास्कर से चर्चा में शिक्षक ने कहा कि साल 1990 से नदी पार गांव हांदावाड़ा की स्कूल में सेवा दे रहे हैं। 29 सालों से नदी पार कर आना- जाना करते हैं। बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ता है तब डोंगी पलटने का भय रहता है। नदी पार करते वक्त चार बार दुर्घटना होते बची है। ऐसे में हिम्मत बनी हुई है।

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