सुप्रीम कोर्ट में एनसीपीसीआर का हलफनामा:कोरोनाकाल में 30071 बच्चे बेसहारा

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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कोरोना के चलते देशभर में 30,071 बच्चे बेसहारा हुए हैं। इनमें 26,176 बच्चों ने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया और 3,621 बच्चे अनाथ हो गए। वहीं, 274 बच्चे ऐसे बच्चे हैं जिन्हें रिश्तेदारों ने भी छोड़ दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ऐसे बच्चों को गोद देने के लिए विज्ञापन देना गैरकानूनी है।

मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 706 बच्चे अनाथ हुए हैं। बच्चों को बेसहारा छोड़ने के सबसे ज्यादा 226 मामले भी मध्य प्रदेश के ही हैं। एनसीपीसीआर ने सोमवार को कोर्ट में पेश हलफनामे में बताया, 1 अप्रैल, 2020 से 5 जून, 2021 तक के ऐसे बच्चों के राज्यवार आंकड़े बाल स्वराज पोर्टल पर हैं, जो बेसाहारा हुए हैं। हालांकि, पोर्टल पर मौत के कारणों का उल्लेख नहीं है।

कोर्ट का आदेश- गैरकानूनी ढंग से बच्चों को गोद देने वाले एनजीओ पर कार्रवाई करें राज्य

कोरोनाकाल में बेसहारा हुए बच्चों की देखभाल के मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश आया। जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने गैरकानूनी तरीके से बच्चों को गोद देने में लगे एनजीओ व लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

एनसीपीसीआर ने सोमवार को बच्चों को अवैध रूप से गोद देने का जिक्र कोर्ट में किया था। पीठ ने कहा, ऐसे बच्चों को गोद देने के लिए विज्ञापन देना गैरकानूनी है। सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथाॅरिटी की भागीदारी के बिना गोद लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। किशोर न्याय अधिनियम-2015 के विपरीत प्रभावित बच्चों को गोद लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।